Radha Ashtami: राधाष्टमी तीन सितम्बर को, कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद मनाई जाती है राधाष्टमी, सुहागिनों को भोजन कराने के बाद करें व्रत का पारण, देखें पूजन विधि, वीडियो में देखें राधा-कृष्ण की सुंदर झांकी, सुनें भजन
राधाष्टमी विशेष। कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्टमी मनाई जाती है, जो कि भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को पड़ती है। अर्थात भाद्रपद कृष्ण पक्ष का अष्टमी को कृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाते हैं तो वहीं भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधाजी का जन्मदिन मनाते हैं। इस बार राधाष्टमी तीन सितम्बर को मनाई जाएगी। इस दिन राधा जी का विशेष पूजन व व्रत किया जाता है। सबसे पहले राधाजी का पंचामृत के स्नान कराएं। इसके बाद उनका श्रंगार करें।
राधा जी का इस तरह से करें पूजन
सुबह स्नान आदि कर शरीर शुद्ध करें। मंडप के भीतर मंडल बनाकर उसके बीच में मिट्टी या तांबे का शुद्ध बर्तन रखकर उस पर दो वस्त्रों से ढकी हुई राधा जी की स्वर्ण या किसी धातु की बनी हुई सुंदर मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद मध्याह्न के समय श्रद्धा, भक्तिपूर्वक राधाजी की पूजा करनी चाहिए। भोग लगाकर धूप-दीप, पुष्प आदि से आरती करनी चाहिए। यदि हो सके तो इस दिन उपवास रखकर राधा जी की पूजा करें। फिर दूसरे दिन सुहागिनों को भोजन कराकर, मूर्ति दान करने के बाद स्वंय भोजन कर व्रत का पारण करें। मान्यता है कि इस तरह से राधा जी की पूजा व व्रत करने से मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है व इस लोक और परलोक के सुख भोगता है।
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