Ceasefire: ईरान के साथ सीजफायर के बाद ट्रंप की अपने ही देश में बढ़ी मुश्किलें…85 सांसदों ने मांग लिया इस्तीफा-Video
US-Israel Iran War Ceasefire: अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था और करीब 6 हफ्ते चले इस युद्ध के बीच सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिया है. इससे दुनिया भर ने राहत की सांस ली है क्योंकि सीजफायर से कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने ईरान की पूरी सभ्यता को ही खत्म करने की धमकी दी थी. फिलहाल सीजफायर के बाद से ईरान में खुशी का माहौल है लेकिन अमेरिका में ट्रंप अपने ही लोगों का विरोध झेल रहे हैं. इसी बीच 85 सांसदों ने ट्रंप से इस्तीफा मांग लिया है.
ट्रंप ने दिया नया मैसेज
सीजफायर की घोषणा के साथ ही ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के साथ अगले दो हफ्ते तक सीजफायर करते हैं. साथ ही शर्त रखते हुए ट्रंप ने कहा कि इसके लिए ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी हटानी होगी और जहाजों को सुरक्षित निकालना होगा. ट्रंप ने आगे ये भी कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के ट्रैफिक से निपटने में अमेरिका ईरान की मदद करेगा. बता दें कि युद्ध के शुरू होने के समय से ही ईरान ने होर्मुज में नाकेबंदी कर दी थी और सभी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी लेकिन कुछ दिनों बाद ही ईरान ने स्पष्ट किया था कि उसके मित्र राष्ट्रों के लिए होर्मुज हमेशा खुला है, लेकिन दुश्मन देशों के लिए होर्मुज को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा की थी.
मालूम हो कि इस युद्ध में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर भारी बमबारी की थी जिसमें तेहरान और कौम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची. ईरान के सबसे बड़े ब्रिज को भी अमेरिका ने उड़ा दिया था. तो वहीं कॉलेज, यूनिवर्सिटी, स्कूल और अस्पतालों पर भी अमेरिका-इजरायल ने जमकर बम बरसाए थे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ईरान के लोग त्राहि-त्राहि करते दिख रहे थे लेकिन अब माना जा रहा है कि सीजफायर के बाद ईरान को बड़ी राहत मिली है.
हर्जाना दे अमेरिका-इजरायल
सीजफायर के बाद अब ईरान को पूरा फोकस युद्ध में ध्वस्त हो चुके ढांचों का पुनर्निमाण करना है. उसने सीजफायर की शर्तों में एक शर्त ये भी रखी है कि वो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों-तेल टैंकरों से टोल वसूलेगा और इसी की मदद से वह पुनर्निमाण कार्य करेगा. हालांकि ईरान पहले अमेरिका-इजरायल उसे हर्जाना देने की मांग कर रहा था ताकि वो निर्माण कार्य करा सके.
तो वहीं ट्रंप ने ईरान की शर्तों को लेकर कहा कि उसे 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और विश्वास है कि यह बातचीत के लिए एक व्यवहार्य आधार है. साथ ही ट्रंप ने ये भी कहा कि ये अतीत के लगभग सभी विवादित मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बन चुकी है.
ईरान ने रखीं ये 10 शर्तें
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का ही पूरा नियंत्रण आगे भी जारी रहे
लेबनान के वीर इस्लामी प्रतिरोध सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति
ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाएं
IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को रद्द करना
आक्रामकता खत्म करना
यूरेनियम इनरिचमेंट को स्वीकार करना
UNSC के सभी प्रस्तावों को रद्द करना
सभी द्वितीयक प्रतिबंध भी हटाए जाएं
क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी
ईरान को मुआवजा देना
ट्रंप पर लगा ये आरोप
बता दें कि 28 फरवरी को जब ट्रंप ने ईरान पर इजरायल के साथ मिलकर हमला शुरू किया था तब उनको लगा था कि वे वेनेजुएला की तरह ही ईरान पर भी कब्जा कर लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ईरान उनके हर हमले का जवाब देता रहा. आखिरकार अमेरिका को सीजफायर के लिए ऐलान करना पड़ा. क्योंकि ईरान के पास खोने को बहुत कुछ नहीं था लेकिन अमेरिका की इकोनॉमी को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक साख भी लगातार सवाल उठ रहे थे. इस तरह युद्ध के छठें हफ्ते में सीजफायर का ऐलान अमेरिका को करना ही पड़ा.
तो वही अमेरिका में राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार 85 से अधिक डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पद से हटाने की मांग की है. तो वही अमेरिका में राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार 85 से अधिक डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पद से हटाने की मांग की है. वैसे तो ये सभी सांसद विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी के हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि ट्रंप पर इतने बड़े पैमाने पर विपक्ष का दबाव पहले कभी नहीं आया.
तो वहीं अमेरिका से ये भी नैरेटिव निकल कर सामने आया है कि ट्रंप ने ये युद्ध एप्सटीन फाइल्स के गंदे अपराधों को दबाने के लिए शुरू किया. तो वहीं ट्रंप ने ईस्टर के मौके पर सोशल मीडिया पर बड़ा ही गुस्सैल और गाली भरा पोस्ट शेयर किया था जिससे अमेरिका के अंदर उनके खिलाफ विरोध शुरू हो गया था तो वहीं अब अमेरिका के कई सांसद और नेता ये भी कह रहे हैं कि ट्रंप का ईरान युद्ध को लेकर बार-बार रणनीति व शब्द बदलना, गाली भरा पोस्ट लिखना कहीं न कहीं उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़ा करता है.
25वें संशोधन की धारा 4 लागू करने की बढ़ी मांग
अमेरिका में कांग्रेस के अधिवेशन में 25वें संशोधन की धारा 4 लागू करने की मांग में तेजी देखी जा रही है. माना जा रहा है कि इसी धारा की मदद से अब अमेरिकी सांसद ट्रंप के सनक का सही इलाज करेंगे.
वैसे तो अमेरिका के नियमों को देखा जाए तो यहां किसी को भी राष्ट्रपति पद से हटाना आसान नहीं होता है लेकिन यहां कुछ नियम-कानून ऐसे भी मौजूद हैं, जो देश में व्याप्त परिस्थिति के हिसाब से इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इन्हीं में से एक है 25वां संशोधन जिसके इस्तेमाल की मांग अमेरिकी सांसद कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, इसमें चार धाराएं हैं और इसकी चौथी धारा को ट्रंप पर लगाने की मांग की जा रही है
धारा 1: यदि देश का राष्ट्रपति मर जाता है या इस्तीफा दे दे या हटा दिया जाए तो उपराष्ट्रपति पूर्ण रूप से राष्ट्रपति बन जाता है.
धारा 2: अगर उपराष्ट्रपति का पद खाली हो तो राष्ट्रपति नया नाम प्रस्तावित करता है, जिसके लिए कांग्रेस की मंजूरी चाहिए होती है.
धारा 3: अगर राष्ट्रपति खुद को अस्थायी रूप से अक्षम महसूस करता है तो वह उपराष्ट्रपति को अस्थायी रूप से सत्ता सौंप सकता है.
धारा 4: यह धारा ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत (15 में से 8) को ये अधिकार मिला हुआ है कि वे लिखित रूप से घोषणा करें कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए असमर्थ हैं. इसी के बाद उपराष्ट्रपति शीघ्र ही एक्टिंग राष्ट्रपति बन जाता है. यदि इस दौरान राष्ट्रपति अपने ठीक होने का दावा करता है तो 4 दिन में कैबिनेट और उपराष्ट्रपति को कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से साबित करना पड़ता है.
छोटा सा देश ईरान न्यूक्लियर संपन्न देश अमेरिका इज़राइल से अकेले ही जिस बहादुरी से लड़ा काबिल-ए-तारीफ़ है🫡
अन्ततः अमेरिका सीज फ़ायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा और पाकिस्तान से कहकर युद्ध रुकवा दिया 😎
आज ईरान की जनता जश्न मना रही है😀
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— Student. (@Student_7701) April 8, 2026
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