Utpanna Ekadashi-2022: उत्पन्ना एकादशी 20 नवम्बर को, न करें दशमी की रात को भोजन, केवल फलों का ही लगाएं भोग, जानें पूजन विधि और कथा

November 18, 2022 by No Comments

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एकादशी विशेष। मार्ग शीर्ष कृष्ण एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 20 नवम्बर को पड़ रही है। 18 के साथ ही 19 नवम्बर को भी दशमी तिथि ही है। इसीलिए 20 नवम्बर को एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य को जीवन में सुख-शांति मिलती है।

न करें दशमी की रात भोजन
आचार्य महादेव तिवारी बताते हैं कि इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद विष्णुलोक का वास प्राप्त होता है। व्रत रखने वाले को दशमी के दिन रात में भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन ब्रह्मवेला में ही भगवान को पुष्प, जल, धूप, दीप, अक्षत से पूजन करके निर्जला व्रत करना चाहिए। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है। परनिन्दक, चोर, दुराचारी, ब्राह्मणद्रोही, नास्तिक इन सब लोगों ने इस दिन बात नहीं करनी चाहिए। अगर गलती से ऐसा हो जाता है तो सूर्य भगवान के सामने स्थिर होकर प्रार्थना करनी चाहिए।

पढ़ें व्रत कथा
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि सतयुग में मुर नामक दैत्य चंद्रवती नामक राजधानी में रहता था। उसने सब देवताओं पर विजय प्राप्त कर इंद्रासन को जीत लिया था। वह सूर्य, चंद्र आदि देवताओं के स्थान पर खुद ही प्रकाश पुंज बनकर चमकने लगा। इस पर देवताओं ने भगवान विष्णु की शरण ली। तब भगवान ने उसे मारने का उपाय सोचा और युद्ध आरम्भ कर दिया। विष्णु जी ने बाणों से दानवों का तो संहार कर दिया लेकिन मुर नहीं मरा। क्योंकि वह किसी देवता के वरदान से अजेय था। युद्ध करते-करते जब काफी समय बीत गया, तो भगवान एक गुफा में घुस गए। वह मुर से लड़ना छोड़कर बद्रिकाश्रम की गुफा में आराम करने लगे। इस पर मुर ने भी पीछा नहीं छोड़ा और उनका पीछा करते हुए वह भी गुफा घुसकर जैसे ही विष्णुजी पर प्रहार करना चाहा, वैसे ही एक कन्या प्रकट हुईं और कन्या ने मुर का संहार कर दिया।

फिर भगवान विष्णु कन्या से प्रसन्न होकर बोले, हे देवी! तुम आज मार्गशीर्ष कृष्ण की एकादशी को प्रकट हुई हो। इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। तुम्हें लोग उत्पन्ना एकादशी कहकर लोग पुकारेंगे। आज ही के दिन यह एकादशी मनाई जाएगी और इसी दिन तुम्हारी पूजा की जाएगी। तुम इस संसार के मायाजाल में मोहवश उलझे प्राणियों को मुझ तक लाने में सक्षम होगी। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रहकर तुम्हारी पूजा करेंगे, वे पाप मुक्त होकर विष्णुलोक प्राप्त करेंगे। तेरी आराधना करने वाले प्राणी आजीवन सुखी रहेंगे। एक समय भोजन करने वाला प्राणी धन-धान्य से पूर्ण होकर सुख-लाभ भोगेगा। वही कन्या एकादशी हुई। वर्षभर की चौबीसो एकादशियों में इस एकादशी का अपूर्व माहात्म्य है। भगवान विष्णु जी से उत्पन्न होने के कारण ही इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा।