तो क्या इस वजह से पूरे प्रदेश में बंद कराए जा रहे हैं 50 से कम छात्र संख्या वाले बेसिक स्कूल? शिक्षक संगठन ने किया चौंकाने वाला खुलासा; जताया इस बात का अंदेशा

September 30, 2024 by No Comments

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Basic Shiksha: पूरे उत्तर प्रदेश में संचालित बेसिक शिक्षा के स्कूलों को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. मिली जानकारी के मुताबिक, 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई जा रही है. इसके लिए प्रदेश भर के जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA)प्रस्ताव बनाकर राज्य परियोजना कार्यालय को भेज रहे हैं.

बीएसए ने कही ये बात

इस सम्बंध में बीएसए कानपुर सुरजीत कुमार सिंह ने मीडिया को दिए बयान में बताया कि राज्य परियोजना कार्यालय से 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को नजदीक के सरकारी स्कूलों में विलय करने की जानकारी मांगी गई है. इसके लिए सभी खंड शिक्षाधिकारियों को प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है. हालांकि बेसिक शिक्षा के सूत्रों के मुताबिक कानपुर में 773 स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज करने का प्रस्ताव भेजा गया है.

अगर ऐसा होता है तो कानपुर में 773 स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा और यहां के बच्चों को पास के ही दूसरे स्कूल में मर्ज कर दिया जाएगा. फिलहाल इसको लेकर जूनियर हाईस्कूल महासभा के पदाधिकारी लगातार विरोध कर रहे हैं.

शिक्षक ने किया चौंकाने वाला दावा

इस सम्बंध में महासभा के अनुग्रह त्रिपाठी ने ये प्रस्ताव सरासर गलत है. वह कहते हैं कि नियम के मुताबिक, एक गांव में एक किलोमीटर के दायरे में स्कूल होना चाहिए, अगर स्कूलों को बंद कर दूसरे गांव में या फिर 3-4 किलोमीटर की दूरी पर मर्ज कर दिया जाएगा तो छोटे-छोटे या फिर कक्षा-1 में पढ़ने वाले बच्चे इतनी दूर जाने में असमर्थ होंगे और फिर बच्चे स्कूल छोड़ना शुरू कर देंगे.

इसी के साथ ही अनुग्रह त्रिपाठी ने कहा कि गांवों में धड़ल्ले से प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं, जहां पर कम फीस में अच्छी शिक्षा का लालच भोले-भाले ग्रामीणों को दिया जा रहा है. जबकि ये स्कूल मानक के विपरीत संचालित हो रहे हैं और यहां पर पढ़ाने वाले शिक्षक भी केवल कक्षा-10 और 12 ही पढ़े हुए हैं. इन स्कूलों के खिलाफ कई बार शिकायत होने के बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं की गई है.

अगर स्थानीय स्तर पर इन स्कूलों पर कार्रवाई हो और ये बंद हो जाएं तो इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे खुद ब खुद ही परिषदीय स्कूलों में आएंगे लेकिन फर्जी स्कूलों पर कोई कार्रवाई ही नहीं की जा रही है. अनुग्रह त्रिपाठी कहते हैं कि इस पूरी स्थिति को देखकर आशंका है कि सरकारी शिक्षण व्यवस्था को खराब करने की साजिश की जा रही है. इसी के साथ ही सरकारी स्कूलों में होने वाली शिक्षकों की नई भर्ती को भी प्रभावित करने की साजिश करने का अंदेशा दिखाई दे रहा है. अनुग्रह ने कहा कि वर्तमान में कानपुर में करीब 1600 स्कूल हैं और अगर इनमें से 773 स्कूल अगर बंद कर दिए जाते हैं तो शहर से लेकर गांव तक उन बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी, जो आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे हैं.

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