Vishwakarma Puja 2022: पौराणिक काल के सबसे बड़े सिविल इंजीनियर व वास्तुकार थे विश्वकर्मा भगवान, जयंती 17 सितम्बर को, देख आरती
विश्वकर्मा पूजा विशेष। प्रत्येक वर्ष 17 सितम्बर को होने वाली भगवान विश्वकर्मा की पूजा इस बार शनिवार को मनाई जाएगी। भगवान विश्वकर्मा को पौराणिक काल का सबसे बड़ा सिविल इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इसी परम्परा को निभाते हुए प्रत्येक साल उनकी जयंती 17 सितंबर को मनाई जाती है।
इस सम्बंध में आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका और जगन्नाथपुरी का निर्माण करवाया था। उन्होंने ही भगवान शिव जी का त्रिशूल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र तैयार किया था। इसी कारण उनको इंजीनियर और तकनीकी क्षेत्र से जुडे़ लोग विश्वकर्मा जी को अपना भगवान मानते हैं और हर साल विश्वकर्मा जयंती को हर्षोल्लास से मनाते हुए उनकी पूजा करते हैं।
इन संस्थानों और कारखानों में की जाती है पूजा
विश्वकर्मा जयंती (17 सितम्बर) को सभी औद्योगिक संस्थानों और कारखानों में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा की जाती है। अब तो इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों में भी इनकी पूजा शुरू कर दी गई है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से व्यापार व उद्योग में तरक्की और प्रगति के रास्ते खुलते हैं। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी भगवान की पूजा करते हुए कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि, जिस किसी से भी निर्माण कार्य या फिर रचना की जा रही हो, उसकी पूजा विधि-विधान से करते हैं। बड़े संस्थानों, कारखानों में हवन आदि भी कराया जाता है, लोग शस्त्र और औजारों की भी पूजा करते हैं। कहते हैं कि कलयुग में तो भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करना अत्यंत जरूरी है, क्योंकि आज के युग में आधुनिक कलपुर्जों, जैसे लैपटॉप, कम्प्यूटर, मोबाइल आदि के बिना आम लोगों का रह पाना मुश्किल है।
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