Health Care: ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन हेमरेज, ब्रेन अटैक, बरतें सावधानी, रहें सतर्क, जानें कैसे बचें

January 8, 2023 by No Comments

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प्रत्येक वर्ष 29 अक्तूबर को वर्ल्ड स्ट्रोक डे अर्थात विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाना है। हार्ट अटैक के बारे में तो लोग बहुत कुछ जानते हैं लेकिन ब्रेन अटैक या ब्रेन स्ट्रोक को लेकर लोगों ने न तो ज्यादा जागरुकता है और न ही लोग इसको लेकर अधिक सचेत होते हैं। ब्रेन स्ट्रोक के अधिकतर मामले सर्दी में भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में हमें सतर्क रहने की अधिक आवश्यकता होती है।

आयुर्वेदाचार्य रोहित यादव बताते हैं कि ऐसा करना सीधे-सीधे मुसीबत को न्योता देना है, क्योंकि सिर्फ उम्रदराज ही नहीं, अब युवा भी ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आने लगे हैं। इसका कारण कहीं ना कहीं गलत लाइफस्टाइल व खान-पान भी है। ऐसे में आज की इस आर्टिकल के जरिए हम आपको यही बताएंगे कि ये बीमारी होती क्यों है, किन्हें ज्यादा खतरा और इससे बचा कैसे जा सकता है…

रोहित यादव बताते हैं कि अक्सर लोगों को लगता है कि ब्रेन अटैक, स्ट्रोक और हेमरेज एक ही है, जबकि ऐसा नहीं है। जब दिमाग की नसों में खून की सप्लाई कम हो तो उसे छोटा ब्रेन स्ट्रोक कहा जाता और जब सप्लाई रुक जाए तो इसे बड़ा स्ट्रोक कहते हैं, जिसमें व्यक्ति की जान भी जा सकती है। तो वहीं, जब नसें ब्लॉक हो जाती हैं, तो उसे एस्केमिक यानी ब्रेन अटैक और जब दिमाग की नसें फट जाए तो उसे ब्रेन हेमरेज कहा जाता हैं।

जब दिमाग तक ऑक्सीजन और खून पहुंचाने वाली रक्त धमनियों (आर्टरी) में रक्त जमा अर्थात ब्लड क्लॉट बनते हैं, तो मस्तिष्क के सेल्स मरने लगते हैं और खून की सप्लाई रुक जाती है। इसके कारण दिमाग के काम पर असर पड़ता है, जिसे ब्रेन स्ट्रोक कहा जाता है। वैसे तो स्ट्रोक किसी भी वक्त हो सकता है लेकिन ज्यादातर मामले सुबह के समय होते हैं, क्योंकि उस वक्त ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है।

दो तरह के होते हैं ब्रेन स्ट्रोक
पहला मिनी स्ट्रोक, जिसमें मरीज को बोलने में दिक्कत, कमजोरी महसूस होती है। इसमें शरीर का एक तरफ का पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, लेकिन 24 से 48 घंटे (1-2 दिन) में वो ठीक भी हो जाता है। ऐसे मामलों में रिकवरी की संभावना 90% होती है, लेकिन अगर सही इलाज ना मिले तो अगले 2-3 सालों में फुल फ्लैज्ड अटैक की आशंका रहती है।

दूसरा फुल फ्लैज्ड स्ट्रोक, जिसमें मरीज को लकवा मार जाता है और चेहरा टेढ़ा हो सकता है। इसमें रिकवरी की चांसेस इस बात पर निर्भर होते हैं कि अटैक किस आर्टरी पर और कितना हुआ है। अगर मेन आर्टरी पर अटैक हुआ हो जाए तो 50% मामलों में ही रिकवरी हो पाती है।

जानें क्या हैं ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
शरीर के किसी एक तरफ के हिस्से पर पैरेलेसिस हो जाना
चेहरा टेढ़ा हो जाना
हाथ या पैर का सुन्न होना
बोलने व देखने में दिक्कत होना
चक्कर व उल्टियां होना
तेज सिरदर्द

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि हालांकि इसके लक्षण कौन-सी नस ब्लॉक हुई है इस पर निर्भर करते हैं। अगर दिमाग के पीछे की नस ब्लॉक हुई हो तो चक्कर, उल्टी, बैलेंस बिगड़ना जैसे लक्षण नजर दिखते जबकि आगे की नस ब्लॉक होने पर लकवा, बोलने या देखने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई देंगे।

इन लोगों को जरूरत है सतर्क रहने की
यूं तो ब्रेन स्ट्रोक किसी को भी, किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 50 से अधिक उम्र के लोग, उम्रदराज, डायबिटीक पेशेंट, कॉलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर के मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

इसके अलावा स्मोकिंग, शराब पीने वाले वालों को भी अधिक खतरा होता।

ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री होने पर इसकी संभावना 50% तक बढ़ जाती है।

जानें कैसे बच सकती है मरीज की जान
अटैक के साढ़े चार घंटे के अंदर अगर मरीज को इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। 10-15% मामलों में इलाज में देरी के कारण मरीज की मौत हो जाती है। ऐसे में ध्यान रखें कि मरीज को उसी हॉस्पिटल में ले जाए जहां 24 घंटे सीटी स्कैन की सुविधा हो।

ब्रेन स्ट्रोक के बाद कई बार मरीजों को कई तरह की समस्या का करना पड़ता है सामना
फेफड़ों में इंफेक्शन
निमोनिया
पैरों की नसों में थक्के जमना जो कई बार दिल की तरफ भी चले जाते हैं
लेटे रहने से कमर में घाव होना।