Amalaki Ekadashi: आमलकी एकादशी होली से पहले पड़ने के कारण कहते हैं इसे रंगभरी एकादशी भी, पढ़ें कथा, देखें पूजन विधि
एकादशी विशेष। फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं. इस बार यह एकादशी 3 मार्च को पड़ रही है. होली से पहले पड़ने के कारण इस एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहते हैं. इस एकादशी में आंवले के वृक्ष के में भगवान का निवास होने के कारण उसी के नीचे भगवान का पूजन किया जाता है. यही आमलकी एकादशी कहलाती है.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन व्रत रखकर आंवले का उबटन, आंवले के जल से स्नान, आंवला पूजन, आंवला खाना तथा आंवला दान करना चाहिए. सर्वप्रथम व्रत रखने वाले को स्नान आदि से निवृत्त होकर आंवले के वृक्ष को भी स्नान कराना चाहिए. फिर आंवले के वृक्ष का धूप, दीप, चंदन, रोली, पुष्प, अक्षत आदि से पूजन कर उसके नीचे ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए.
पढ़ें कथा

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)