Health Tips: स्ट्रोक के पहचानें लक्षण और तुरंत करें ये काम…भारत में हर 5 मिनट में हो रही एक मौत; ठंड में अधिक खतरा

December 19, 2025 by No Comments

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Health Tips: कड़ाके की ठंड शुरू हो चुकी है. देश के तमाम हिस्सों में हड्डियां तक कंपा देने वाली शीतलहर बह रही है. घर के बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. तो वहीं लगातार स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा) के मामले बढ़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं. दरअसल सर्दियों में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं. चूंकि खून गाढ़ा होता है. इसलिए थक्का बनने की संभावना अधिक बढ़ जाती है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि इस वजह से रक्तचाप बढ़ता है और हृदय पर दबाव पड़ता है लेकिन इसको लेकर मौसमों में तो सावधानी बरतनी ही चाहिए, हालांकि गर्मी और प्रदूषण से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है.

स्ट्रोक को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर डा. अनुज कुमार (@dranuj_k) ने एक पोस्ट शेयर की है. वह क्रेनियोफेशियल सर्जन हैं और झारखंड की सेहत सुधारने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं. इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि हमारे देश में औसतन हर 5 मिनट में एक मृत्यु स्ट्रोक की वजह से होती है.

जानें क्या हैं स्ट्रोक के मुख्य लक्षण

वह कहते हैं कि अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सूनापन खासतौर से चेहरा, हाथ या पैर (अक्सर शरीर के एक ही तरफ) या फिर मरीज़ का मुँह टेढ़ा भी हो सकता है.

बोलने में कठिनाई हो जाना या फिर शब्द का ठीक से नहीं निकलना. या किसी की बात समझ में न आना. बोलते समय जुबान लड़खड़ाना. इसके अलावा देखने में परेशानी होना या फिर एक या दोनों आँखों से धुंधला या कम दिखना.

चलने में कठिनाई होना. यानी चलते वक्त संतुलन बिगड़ना या फिर चक्कर आना.

सिर में अचानक या भी बहुत तेज दर्द होना. कभी-कभी उल्टी के साथ खासकर उस वक्त जब स्ट्रोक हो ब्लीडिंग आना.

बेहोशी या मानसिक भ्रम. इसमें व्यक्ति अचानक होश खो सकता है या समझना-बोलना बंद कर देता है.

FAST Rule से पहचानें स्ट्रोक

F – Face: मुँह टेढ़ा हो गया क्या?

A – Arm: देखें कहीं एक हाथ उठाने में कमजोरी तो नहीं?

S – Speech: कहीं बोलने में कोई कठिनाई को नहीं?

T – Time: समय बर्बाद न करें और तुरंत अस्पताल जाए.

तुरंत करें ये काम

अगर ऊपर दिए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत एंबुलेंस बुलाए या नज़दीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाएं. सिर थोड़ा ऊँचा रखें. कुछ खाने या पीने को न दें. अगर मरीज़ बेहोश हो, साँस और नब्ज़ तुरंत चेक करें.

याद रखने वाली बात

डा. अनुज कहते हैं कि अगर पहले 3 घंटे यानी Golden Hours में मरीज को इलाज मिल जाए तो जान के साथ ही दिमाग दोनों को बचाया जा सकता है.

DISCLAIMER: यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल एक्सर्ट की राय पर आधारित है. किसी भी उपाय आदि को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लें. इसकी पुष्टि खबर स्टिंग नहीं करता है.

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