Sakat Chauth-2026: सकट चौथ पर इन वस्तुओं का करें दान…प्रसन्न होंगे गजानन; धन-धान्य से भरेगा घर

January 5, 2026 by No Comments

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Sakat Chauth-2026: सनातन धर्म में प्रत्येक हिंदी तिथि और प्रत्येक दिनों का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है और इन पावन तिथियों नें कोई न कोई व्रत व त्योहार मनाए जाते हैं इनमें से ही एक है माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी. इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन को सकट चौथ कहा जाता है और बुद्धि के देवता गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

इस दिन को तिल चौथ भी कहते हैं. इस दिन संतान की दीर्घायु व बेहतर स्वास्थ्य के लिए माताएं निर्जला व्रत रखती हैं. यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है. गणपति महाराज को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है, इसलिए हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि उनकी आराधना के लिए विशेष मानी जाती है और हर चतुर्थी तिथि का अपना अलग महत्व भी है. शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को रखने से जीवन में आने वाले कष्ट, बाधाएं और संकट दूर होते हैं. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि

वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से हो रहा है और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक मान्य रहेग. ऐसे में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026 दिन मंगलवार को ही मनाया जाना शुभ रहेगा. चूंकि ये त्योहार तिल का है तो कई घरों में माना जाता है कि मंगलवार के दिन तिल नहीं चटकाने चाहिए लेकिन लोक मान्यता है कि दिन से बड़ा त्योहार होता है. इसलिए मंगलवार को तिल भून कर लड्डू व तिल का बकरा बनाने कोई दोष नहीं होगा.

बता दें कि ये त्योहार संतान के लिए रखा जाता है. इस दिन काले तिल या फिर लइया को भून कर उसमें गुड़ मिलाकर बकरा बनाया जाता है जिसकी गर्दन को बेटा या बेटी काटते हैं.

ये वस्तुएं कर सकते हैं दा

सकट चौथ पर तिल और गुड़ का दान करना श्रेष्ठ माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं. इसके अलावा समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है.

इस दिन किसी ब्राह्मण को तांबे का पात्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा भी दे सकते हैं. इसे व्रत की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है. शास्त्रों में माना गया है कि दक्षिणा के बिना कोई भी पूजा पूरी नहीं होती. इसलिए जो भी श्रद्धा हो उस हिसाब से दक्षिणा भी वेदपाठी ब्राह्मण को दें.

इस दिन जरूरतमंद लोगों को या फिर योग्य ब्राह्मण को ऊनी वस्त्र, कंबल आदि व जूते-चप्पल का दान करना चाहिए. इससे पितृ दोष शांत होता है और संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं.

इस दिन भूखे व्यक्ति को भोजन कराना चाहिए. अनाज का दान भी कर सकते हैं. ऐसा करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती. धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक संकट दूर होता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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