Haritalika Teej Vrat: आखिर क्यों इस व्रत का नाम पड़ा हरितालिका तीज…जानें? पूजन सामग्री की देखें पूरी लिस्ट-Video
Haritalika Teej Vrat: भादो मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथी को हरितालिका तीज का व्रत किया जाता है.सुहागन महिलाएं जहां इस व्रत को पति की दीर्घायु के साथ ही घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं तो वहीं कुमारी लड़कियां इस व्रत को मनवांछित वर पाने के लिए रखती हैं. यह व्रत निर्जला रखा जाता है. यानी इस व्रत में करीब 31 घंटे तक व्रती जल नहीं पीती हैं. इस बार ये व्रत 14 सितम्बर को पड़ रहा है.
सुबह स्नान करने के बाद व्रती व्रत को लेकर संकल्प करती हैं और दिन भर भगवान शिव व माता पार्वती का नाम जप करते हुए व्रत रखती हैं. इस व्रत में व्रती घर पर ही पूजा का पूरा सामान तैयार करती हैं. शाम को गोधूलि बेला के दौरान हरितालिका व्रत की पूजा की जाती है.
ऋतुफल यानी खीरा, नींबू, केला, मिठाई, फूल, पंचामृत आदि भोग के लिए पूजा सामग्री तैयार की जाती है. तो वहीं मिट्टी या रेत के शंकर भगवान, माता पार्वती और गणेश जी बनाए जाते हैं. फिर केले के पत्ते का मंडप के नीचे इनकी पूजा की जाती है. व्रती महिलाएं माता पार्वती और भगवान शंकर व गणेश जी को श्रंगार का सामान यानी साड़ी आदि के साथ ही ऋतुफल, खीरा, नींबू आदि चढ़ाती हैं और फिर कथा सुनती हैं. मान्यता है कि बिना कथा सुने कोई भी व्रत धर्म सनातन में पूरा नहीं होता. इसलिए इस व्रत में कथा जरूर सुनें. व्रत का पारण 15 सितम्बर को भोर पहर में किया जाएगा. पारण से पहले पुरोहित को परम्परानुसार दान अवश्य दें.
पूजा सामग्री
हरितालिका तीज की पूजा सामग्री में लौंग, कपूर, शहद, गंगा जल, बेल पत्र, शमी की पत्ती, मेहँदी की हरी पत्ती, फूल, फल, नींबू, खीरा, सेब, केला, चंदन, चावल, सिंदूर, धूप, घी की आरती, लौं-कपूर की आरती होती है. इस व्रत में सुबह और शाम को आरती की जाती है. श्रंगार के सामान में साड़ी, सिंदूर, बिछिया, लाल चूड़ी,मेंहदी,बिंदी,शीशा, कंघा, हेयर बैंड, क्रीम, पाउडर,नेल पॉलिश आदि रखा जाता है. ये सामग्री माता पार्वती को चढ़ाई जाती है तो वहीं शंकर जी को जनेऊ, अंगौछा, बनियान आदि चढ़ाया जाता है.
हरतालिका कैसे पड़ा नाम?
बता दें कि इस व्रत को हरतालिका इसलिए कहते हैं क्योंकि माता पार्वती की सखी उनको उनके पिता से हर कर यानी अपहरण कर घने जंगल में ले गई थीं. हरत का अर्थ होता है हरण करना और आलिका का अर्थ होता है सखी यानी सहेली. इसीलिए इस व्रत को हरतालिका कहा गया. भगवान शंकर ने माता पार्वती से कहा कि जो महिलाएं इस व्रत को करेंगी उनका सुहाग तुम्हारे समान ही अचल रहेगा.
कथा के अंत में ये बात जरूर बोलें
हे भोले बाबा जैसे आपने माता पार्वती की इच्छा पूरी की वैसे ही सभी व्रती महिलाओं और कुंवारियों की इच्छा भी पूरी करना. जय भोले बाबा, जय माता पार्वती, जय हरतालिका व्रत.
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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