Anant Chaturdashi katha: कौडिन्य ऋषि ने अग्नि में डाल दिया चौदह गांठों वाला डोरा फिर…अनन्त चतुर्दशी कथा-Video
Anant Chaturdashi Katha: हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी व्रत धर्म सनातन में रखा जाता है. अनंत का अर्थ है जिसके आदि ,अंत का पता न हो यानी जो अनादि हो। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान होने के कारण यह व्रत और भी फलदायी माना गया है.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि अनन्त चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। साथ ही 14 गांठों वाला अनंत सूत्र भी बांधा जाता है, जो कि चौदह लोकों का प्रतिनिधित्व करता है। वह कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु जी की उपासना, व्रत करने से सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्तों को भौतिक क्रियाकलापों से दूर होकर वेद ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। इस व्रत की पूजा दोपहर में की जाती है। इसलिए सुबह ही व्रती को स्नान आदि के बाद संकल्प लेकर इसका व्रत शुरू कर देना चाहिए।
पूजा विधि
अनन्त की पूजा को कलश स्थापना से शुरू करनी चाहिए। इसके बाद कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनन्त की स्थापना करनी चाहिए। इसके आगे कुमकुम, केसर, या हल्दी से रंग कर बनाया हुए कच्चे डोरे का चौदह गांठों वाला अनन्त भी रखा जाता है। कुश के अनन्त की वंदना कर के, उसने भगवान विष्णु का आह्वान करना चाहिए। इसी के साथ गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवैद्य आदि से पूजन करना चाहिए। इसके बाद अनन्त देव का ध्यान करके अनन्ता अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें। इस व्रत का पारण ब्राह्मण को दान करके करना चाहिए। अनन्त की चौदह गांठें चौदह लोकों (तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह) की प्रतीक मानी गई हैं। इसमें अनन्त भगवान विद्यमान होते हैं।
ध्यान रखें
अनंत सूत्र हाथ में बांधते समय ध्यान रखना चाहिए कि पुरुष दाहिने और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में इसे बांधना चाहिए।
बोलें ये मंत्र
अनंत सूत्र बांधते समय नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इसका अर्थ है ‘हे वासुदेव! अनंत संसाररूपी महासमुद्र में मैं डूब रही या रहा हूं। आप मेरा उद्धार करें, साथ ही अपने अनंतस्वरूप में मुझे भी आप विनियुक्त कर लें। हे अनंतस्वरूप! आपको मेरा बारम्बार प्रणाम है।
‘अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते॥’
भगवान विष्णु ने इसी दिन रचे थे 14 लोक
चतुर्दशी पर 14 अंक का महत्व शास्त्रों में बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से दुखों का नाश होता है और जीवन में सुख समृद्धि का संचार होता है। परम्परानुसार इस दिन बांह पर 14 गांठों पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इस दिन 14 अंक का महत्व माना गया है. दरअसल इसी दिन भगवान विष्णु ने 14 लोकों को रचा था। इतना ही नहीं इसे रचने के बाद संरक्षक और पालक के तौर पर जिम्मेदारी निभाने के लिए 14 रूप भी धरे थे. यही वजह है कि वह अनंत प्रतीत होने लगे थे.
14 गांठों के ये हैं संदेश
शास्त्रों के मुताबिक, 14 गांठों वाले रक्षासूत्र भूलोक, भुवलोक, स्वलोक, महलोक, जनलोक, तपोलोक, ब्रह्मलोक, अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातल, महातल, और पताल लोक को इंगित करते हैं।
कथा
अनंत चतुर्दशी को लेकर जो कथा प्रचलित है, वो महाभारत काल से सम्बंधित है। मान्यता है कि राज्यहीन हो जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अनन्त की पूजा व व्रत करने की सलाह दी थी। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि यह व्रत करने से उन्हें उनका राज्य जरूर वापस मिलेगा। इस सम्बंध में जब युधिष्ठिर ने अपनी शंका को दूर करने के लिए पूछा था कि यह अनंत कौन हैं? तब श्रीकृष्ण ने कहा कि श्रीहरि के ही स्वरूप को अनन्त कहा गया है। इस व्रत को विधि विधान से करने से जीवन में आ रहे सभी तरह के संकट कट जाते हैं।
कौडिन्य ऋषि और सुशीला की कथा वीडियो में सुनें
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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