Bhairav ​​Jayanti-2022: 16 नवम्बर को मंत्र,जप, दान करने से न चूकें, लाख गुना फलदायी है बुधवारी अष्टमी, भैरव जयंती के साथ ही पड़ रही है सूर्य संक्रांति भी, 9 विधि से करें भैरव की पूजा, रात में बनाएं उड़द की दाल के पकौड़े

November 15, 2022 by No Comments

Share News

मार्गशीर्ष मास (अगहन) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार अष्टमी तिथि 16 नवम्बर 2022, दिन बुधवार को पड़ रही है। इसीलिए इसी दिन काल भैरव जयंती मनाई जाएगी। इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव का अवतार लिया था। इसीलिए इस पर्व को कालभैरव जयंती को रूप में मनाए जाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। बुधवार को अष्टमी पड़ने पर इसे बुधवारी अष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य संक्रांति भी पड़ रही है। पद्म पुराण, सृष्टि खंड में लिखा है कि इस दिन किया गया जप-ध्यान व दान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना हो जाता है।

सूर्य ग्रहण के बराबर मानी गईं हैं ये चार तिथियां
आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि मंत्र, जप एवं शुभ संकल्प के लिए विशेष तिथि, सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी को माना गया है और इन्हीं चार तिथियों को सूर्यग्रहण के बराबर भी माना गया है। अर्थात इस दिन किया गया जप-ध्यान व दान लाख गुना फल देता है। शिव पुराण, विद्यश्वर संहिताः अध्याय 10 में लिखा है कि इन चार तिथियों में किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।

कालभैरव अष्टमी पर करें इस तरह पूजा

कालभैरव अष्टमी पर 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही, एकमुखी रुद्राक्ष भी अर्पण करें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कालभैरव अष्टमी को एक रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खाने को दीजिए। इस क्रम को जारी रखें, लेकिन सिर्फ हफ्ते के तीन दिन (रविवार, बुधवार व गुरुवार)। यही तीन दिन भैरवनाथ के माने गए हैं।

कर्ज से परेशान हैं तो कालभैरव अष्टमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। उन्हें बिल्व पत्र अर्पित करें। भगवान शिव के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जप करें।

मंत्र- ॐ नम: शिवाय।

कालभैरव अष्टमी के एक दिन पहले उड़द की दाल के पकौड़े सरसों के तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढककर रखें। सुबह जल्दी उठकर सुबह 6 से 7 बजे के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकलें और कुत्तों को खिला दें।

सवा किलो जलेबी भगवान भैरवनाथ को चढ़ाएं और बाद में गरीबों को प्रसाद के रूप में बांट दें। पांच नींबू भैरवजी को चढ़ाएं। किसी भिखारी को काला कंबल दान करें।

कालभैरव अष्टमी पर सरसो के तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे पकवान तलें और गरीब बस्ती में जाकर बांट दें। घर के पास स्थित किसी भैरव मंदिर में गुलाब, चंदन और गूगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।

सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरवनाथ के मंदिर में कालभैरव अष्टमी पर चढ़ाएं।

कालभैरव अष्टमी को समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

कालभैरव अष्टमी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान कालभैरव के मंदिर जाएं और इमरती का भोग लगाएं। बाद में यह इमरती दान कर दें। ऐसा करने से भगवान कालभैरव प्रसन्न होते हैं।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)