BJP विधायक को तीन महीने की सजा और 500 रुपये जुर्माना, जानें क्या है मामला
Bihar News: बिहार के पटना के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक मिश्री लाल यादव को तीन महीने की सजा और 500 रुपये का जुर्माना की सजा कोर्ट ने सुनाई है. कोर्ट ने उनके साथ ही उनके साथी सुरेश यादव को भी एक पुराने मारपीट के मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
इस मामले के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई है. राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर लगातार चर्चा हो रही है तो वहीं अब लोगों का कहना है कि हाई कोर्ट में उनकी अपील का क्या परिणाम निकलता है. ये देखने वाला होगा. इस पूरे मामले में जहां मिश्री लाल यादव ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कही है तो वहीं ये भी कहा है कि वह इस निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे. दूसरी ओर इस पूरे मामले में उनके समर्थकों का दावा है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है.
चर्चा में रहा है राजनीतिक सफर
68 वर्षीय मिश्री लाल 2020 में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर अलीनगर से विधायक चुने गए थे. उनका राजनीतिक सफर हमेशा चर्चा में रहा है. 2022 में वह वीआईपी के अन्य विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे. तो वहीं इससे पहले, 2003 से 2009 तक वे बिहार विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं.
2019 की है घटना
घटना 29 जनवरी 2019 की है. रैयाम थाना क्षेत्र के समैला गांव में यह घटना हुई थी. इस मामले में पीड़ित उमेश मिश्र ने 30 जनवरी 2019 को मिश्री लाल यादव और सुरेश यादव के खिलाफ मारपीट और पैसे छीनने का मुकदमा दर्ज कराया था. इसी के साथ ही उमेश मिश्र ने शिकायत में कहा था कि वह सुबह टहल रहा था. इसी दौरान मिश्री लाल यादव और सुरेश यादव ने 20-25 लोगों के साथ मिलकर उन पर हमला किया.
उमेश ने ये भी आरोप लगाया है कि विधायक ने फरसे से उनके सिर पर हमला किया, जिससे उनको गंभीर चोटें आईं और सुरेश यादव ने रॉड व लाठी से उस पर हमला किया और उनकी जेब में रखे रुपए छीन लिए. उमेश ने बताया कि घायल होने पर उनको पहले स्थानीय पीएचसी और फिर दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में भर्ती कराया गया था.
पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की थी चार्जशीट
इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 12 अक्टूबर 2019 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी और फिर 17 अप्रैल 2020 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी. इस मामले में चली लंबी सुनवाई के बाद भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 323 (मारपीट) के तहत यह सजा सुनाई गई है. विशेष न्यायाधीश करुणानिधि प्रसाद आर्य की अदालत ने मिश्री लाल यादव और सुरेश यादव को दोषी ठहराया और तीन महीने की सजा के साथ ही 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है.
बता दें कि इस फैसले के खिलाफ मिश्री लाल यादव ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय एस के दिवाकर की कोर्ट में अपील दायर की थी लेकिन 22 मई 2025 को सुनवाई के दौरान उनकी अपील खारिज कर दी गई और उनके साथ ही उनके साथी को भी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. सजा की अवधि और अन्य कानूनी पहलुओं पर चर्चा के लिए अगली सुनवाई की तारीख 23 मई 2025 तय की गई है.
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