Dhanteras & Deepawali-2022: धनतेरस से लेकर दीपावली पूजा का जानें शुभ मुहूर्त, भैया दूज 27 को, जानें किस समय मनाई जाएगी हनुमान जयंती, देखें लक्ष्मी पूजन सामग्री, पढ़ें पूरी जानकारी, जानें सूर्यग्रहण का सूतक काल

October 19, 2022 by No Comments

Share News

धनतेरस-दीपावली स्पेशल। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसे धन्वन्तरि जयंती एवं धन त्रयोदशी (धनतेरस) भी कहा जाता है। इस बार सनातन धर्म का यह त्योहार 22 अक्टूबर 2022, दिन शनिवार को मनाया जायेगा। धनतेरस दीपावली द्वार पर खड़ी है, की सूचना देता है। आचार्य महादेव तिवारी बताते हैं कि मान्यता है कि इस दिन समुद्र मन्थन में जिस कलश के साथ भगवती लक्ष्मी का अवतरण हुआ था उसी के प्रतीक स्वरूप ऐश्वर्य वृद्धि के लिये बरतन इत्यादि सोना, चांदी, चांदी सिक्का, गणेश, लक्ष्मी, कुबेर, हनुमान आदि ईष्ट देव की मूर्ति, गहने आदि खरीदने की प्राचीन परम्परा चली आ रही है। इस बार चांदी खरीदना अधिक शुभ रहेगा।

आचार्य महादेव तिवारी

नरक चतुर्दशी व हनुमान जयंती 23 को
आचार्य महादेव तिवारी बताते हैं कि धनतेरस के दिन ही खाता बही के लिए किताब, डायरी, पेन, दवात आदि खरीदना भी शुभ रहता है। इसी दिन को धन संचय करने का श्रेष्ठ समय भी माना गया है। आज के दिन लक्ष्मी कुबेर का आवाहन करना चाहिए। दुकान आदि में स्वास्तिक व मांगलिक, चिन्ह बना कर घी मिठाई से निवेदित कर पूजन करना चाहिए और घर, दुकान व प्रतिष्ठानों में बंदनवार, फूल मालाओं से सुसज्जित करना चाहिए। 23 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी एंव हनुमत् जयन्ती है। हनुमान जी की जयंती सांय मेष लग्न में मनाएं।

दीपावली 24 को
आचार्य महादेव तिवारी बताते हैं कि यह पक्ष सोलह दिन का है जो कि सामान्यत: शुभ कारक है। दीपावली का प्रसिद्ध पर्व 24 अक्टूबर 2022, दिन सोमवार को मनाया जाएगा। प्रदोष एवं रात्रि में अमावस्या तिथि 5 बजकर 4 मिनट से लग जायेगी। इसलिए इसी दिन दीपावली का प्रसिद्ध पर्व मनाया जायेगा। दीपावली के इस महान पर्व में प्रत्येक सनातन धर्मी के घर एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठान व फैक्ट्री, मठ- मंदिरों, देवालय आदि संस्थानो में दीप लड़ियों से सुसज्जित किये जायेंगे। इसी दिन गणेश, लक्ष्मी, कुबेर, हनुमान जी का पूजन भी किया जायेगा। दीपावली पर ही शिशुओं के नेत्रों में काजल लगाने की भी परम्परा है, जो कि सदियों से चली आ रही है।

लक्ष्मी पूजन सामग्री
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष पूजन सामग्री इस प्रकार है- कंज, मजीठ, कमल गट्टा, खड़ी धनिया, खील (लावा) गुड, भुर्की ,दूब, कौड़ी, चांदी सिक्का, गणेश, लक्ष्मी, कुबेर, हनुमान मूर्ति, पीला कपड़ा, लाल कपड़ा, रोली, चंदन, सिंदूर, चावल, वस्त्र मूर्ति, माला, फूल, लौग इलाइची, पान, सुपाड़ी, फल, मीठा, अनार ,फल में सरीफा फल, कमल फूल, गुड़ धनिया का अवश्य भोग लगाएं। लक्ष्मी, कुबेर आदि ईष्ट देव का मंत्र जप करे। लक्ष्मी सूक्त या श्री सूक्त का पाठ करें। मंत्र में कमल माला का प्रयोग करें। चौकी पर पीली बस्त्र लपेट कर मूर्तियों को स्थापित कर बिधवत् पूजन करें।

26 और 27 को मनेंगे ये त्योहार
अन्नकूट का पर्व गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर बुधवार को है। भैया दूज 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। मान्यता है कि भैया दूज पर भाईयों को अपनी बहनों के घर पर भोजन करना चाहिए एवं धन वस्त्रादि से उनका सम्मान करना चाहिए एवं चित्रगुप्त पूजा, कलम दवात पूजा भी 27 अक्टूबर गुरुवार को किया जायेगा।

25 को सूर्य ग्रहण
इस बार 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। अमावस्या का स्पर्श 4 बजकर 42 मिनट पर तो मोक्ष 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। अर्थात ग्रहण अवधि 40 मिनट रहेगी। लखनऊ मंडल में स्पर्श समय 4 बजकर 36 मिनट व मोक्ष 5 बजकर 29 मिनट है। अर्थात सूर्यास्त 5 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा और इसी के साथ सूर्य ग्रहण भी समाप्त हो जाएगा, लेकिन सूतक 12 घंटे पहले ही लग जाएगा। अर्थात मंदिर व घरों के पूजा घर के दरवाजे 12 घंटे पहले ही बंद कर दें। अर्थात 24 अक्टूबर की रात 4:30 बजे के बाद से सूतक काल शुरू हो जाएगा।

धनतेरस पूजन का शुभ मुहूर्त
आचार्य महादेव तिवारी के अनुसार सुबह 7 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 13 तक
मध्यान 11 बजकर 47 मिनट से 01 बजकर 59 मिनट तक
सांयकाल 3 बजकर 15 मिनट से 05 बजकर 09 मिनट तक

सर्वश्रेष्ठ मुहुर्त सायं प्रदोष काल एवं वृष लग्न 6 बजकर 44 मिनट से 08 बजकर 47 मिनट का उत्तम समय रहेगा। प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी पर औषधि प्रतिष्ठानों तथा आयुर्वेदिक संस्थानों में भगवान धन्वंतरि की विधिवत् पूजा होगी।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिये तीन मुहुर्त निर्धारित किये गए हैं
दिन में स्थिर कुम्भ लग्न 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक।
सर्वोत्तम स्थिर बृष लग्न सायं 06 बजकर 42 मिनट से 08 बजकर 41 मिनट तक।
श्रेष्ठ महानिशा में स्थिर सिंह लग्न 01 बजकर 04 मिनट से 03 बजकर 21 मिनट तक। विशेष लक्ष्मी पूजन किया जायेगा और तंत्र जगत के लोग भी विशेष पूजन करेंगे।

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)