डिजिटल अरेस्ट होने पर करें ये काम…? इस हेल्पलाइन नम्बर से लें मदद
Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट को लेकर सरकार लगातार जागरुकता अभियान चला रही है और लोगों से अपील कर रही है कि अगर कोई भी वीडियो कॉल के तहत आपको अरेस्ट करने की बात करता है और आप पर किसी तरह के अपराध का आरोप लगाता है तो आपको डरने की जरूरत नहीं और न ही आपको वीडियो कॉल करने वाले जालसाज की सुनने की जरूरत है. ऐसी किसी भी स्थिति में आप तुरंत फोन को काट कर जिस नम्बर से आपको कॉल आई है उसे ब्लॉक कर दें. क्योंकि देश की कोई भी सुरक्षा एजेंसी किसी भी नागरिक को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती.
हालांकि सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरुकता अभियान के बाद भी डिजिटल अरेस्ट से जुड़े तमाम केस सामने आ रहे हैं. इस पर राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं साइबर एक्सपर्ट अमनदीप सिंह की एक सलाह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें उन्होंने कहा है कि कोई भी एजेंसी अथवा पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है न कर सकती है।
उन्होंने इस मामले आगे सलाह दी है कि सजगता ही बचाव है। इसलिए इसको लेकर अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया जा रहा है। अगर आप जागरुक हैं तो कोई भी साइबर अपराधी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। डिजिटल अरेस्ट का कहीं कोई प्रावधान ही नहीं है। बैंक खाते से जुड़ा कोई भी ओटीपी और एटीएम से जुड़ी जानकारी किसी अजनबी से किसी तरह भी शेयर न करें। यह भी हमेशा ध्यान रहे कि बैंक मैनेजर भी आपसे पिन नम्बर नहीं पूछ सकता है।
बता दें कि जैसे-जैसे हम डिजिटल लेन-देने से जुड़ने लगे हैं वैसे-वैसे लगातार साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ने लगी हैं. कई बार ऐसे वीडियो कॉल आते हैं जिसमें फोन करने वाला किसी पुलिस वर्दी में होता है और वह आपको कैमरे के सामने बैठे रहने की बात कहता है और किसी भी अपराध का आप पर आरोप लगाकर उससे कहता है कि उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है और अगर वह पूछे जाने वाले सवालों के सही-सही जवाब नहीं देता तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी. इस तरह से डरा कर जालसाज मासूम लोगों के बैंक एकाउंट खाली कर रहे हैं.
1930 पर करें कॉल
इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना ब्रजेश कुमार यादव इस सम्बंध में बताते हैं कि साइबर ठगी का शिकार हो जाने पर तुरन्त हेल्पलाइन नम्बर 1930 पर फोन करें। इसी के साथ ही हेल्पलाइन से जो भी सवाल पूछे जाये, उन्हें सही-सही बताएं। इस नम्बर के अलावा cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है।
डिजिटल अरेस्ट होने पर करें ये काम
अगर आपके साथ किसी तरह से भी डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति बनती है तो ऐसी कॉल आने पर घबराएं नही. सीबीआई, ईडी, कस्टम या पुलिस आपको वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं कर सकती.
घबराए बगैर स्थिति का आंकलन करने के लिए कुछ समय लें और अपने परिजनों से जानकारी जरूर साझा करें।
अपनी व्यक्तिगत जानकारी बिल्कुल भी शेयर न करें. यानी पता, सामाजिक सुरक्षा संख्या या वित्तीय विवरण आदि की जानकारी न दें.
जिसने आपको डिजिटल अरेस्ट होने के लिए कॉल की है, उससे उसकी पहचान मांगें जैसे कॉल करने वाले का नाम, बैज नंबर और जिस थाने से वे हैं, वह पूछें। क्योंकि असली पुलिस अधिकारी यह जानकारी देंगे और अगर वह आनाकानी करता है तो तुरंत समझ लें कि ये फर्जी है.
कॉल की पुष्टि सबसे पहले करें. फोन काटें और अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन पर सीधे कॉल करें (कॉलर द्वारा दिए गए नंबर का उपयोग न करें) ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि उन्होंने आपको कॉल किया था।
इसके तुरंत बाद ही आप कॉल करने वाले का नंबर ब्लॉक कर दें ताकि वह भविष्य में और कॉल न कर सके।
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