Diwali Katha: लक्ष्मी जी न जाएं आपके घर से…पढ़ें कथा और करें सरल उपाय-Video

November 7, 2026 by No Comments

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Diwali Katha: कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी जी की पूजा आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि ब्रह्मपुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अर्धरात्रि में माता लक्ष्मी खुद ही धरती पर आती हैं और प्रत्येक सद्गृहस्थ के घर पर वितरण करती हैं। जो घर साफ व सुंदर तरीके से प्रकाश से सजा होता है वहां अंश रूप में ठहर जाती हैं और गंदे स्थानों की तरफ देखती भी नहीं हैं।

मान्यता है कि दीपावली मनाने से सद्गृहस्थों के घर पर लक्ष्मी जी स्थायी रूप से निवास करती हैं। वास्तव में धनतेरस, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन, इन तीनों पर्वों का मिश्रण ही दीपावली है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर व रावण आदि राक्षसों का वध करके अयोध्या लौटे थे। इसीलिए दीपोत्सव मनाया जाता है। इस दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दीपों का खास आयोजन किया जाता है। दीपावली को लेकर दो कथाएं प्रचलित हैं. कहते हैं कि दीपावली के दिन इन दोनों कथाओं को एक बार अवश्य सुनना चाहिए.

दीवाली कथा-1

यह कथा त्रेता युग से पहले की हैं जो समुंद्र मंथन के समय से जुड़ी हुई हैं। कहते हैं कि एक बार देवताओं के अहंकार से रुष्ट होकर माता लक्ष्मी पाताल लोक में चली गयी थी जो कि समुंद्र की गहराइयों में था। जब समुंद्र मंथन हुआ तो उसमे से माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थी। यह दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन था जिसे हम शरद मास की पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। यह दिन लक्ष्मी माता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

मान्यता हैं कि कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति रूप में स्वीकार किया था जो कि दिवाली का ही दिन था। इसलिये इस दिन उनकी पूजा करने का महत्व हैं।

दीवाली कथा-2 के लिए देखें वीडियो

एक बार सनत्कुमार जी ने सभी महर्षि-मुनियों से कहा-महानुभाव, कार्तिक की अमावस्या को प्रात:काल स्नान करके भक्तिपूर्वक पितर तथा देव पूजना करना चाहिए. इस दिन रोगी और बालक को छोड़कर किसी अन्य को भोजन नहीं करना चाहिए. शाम को विधि-विधान से लक्ष्मी माता का मंडप बनाकर उसे फूल, पत्ते, तोरण, ध्वज और पताका आदि से सुसज्जित करना चाहिए. अन्य देवी-देवताओं सहित लक्ष्मी जी का षोडशोपचार पूजन तथा पूजन के बाद परिक्रमा करनी चाहिए…इसके आगे की कथा जानने के लिए सुनें पूरा वीडियो. ध्यान रहे कि कथा सुनते वक्त मन को एकाग्र करें और माता लक्ष्मी का ध्यान मन में करें. तभी पूजा सफल होगी.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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