Dussehra ( Vijayadashami): दशहरा की तिथि को लेकर ज्योतिषाचार्यों की अलग-अलग राय, विजयदशमी के लिए पूर्ण नहीं हैं 4 और 5 अक्टूबर की तिथियां, इस लेख में समझें विजयदशमी को किस नक्षत्र और तिथि में मनाने की है परम्परा

October 3, 2022 by No Comments

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विजयदशमी स्पेशल। रक्षाबंधन की तरह की दशहरा की तिथि को लेकर भी ज्योतिषाचार्यों के बीच घोर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कई पंचांग 4 अक्टूबर तो कई 5 अक्टूबर को दशहरा (विजयदशमी) मनाने की सलाह दे रहे हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में इस लेख के जरिए अपने पाठक को बता दें कि दशहरा कब मनाए जाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक दशहरा आश्वनि शुक्ल दशमी को उस वक्त मनाया जाता है, जब श्रवण नक्षत्र, प्रदोष व्यापिनी एवं नवमी विद्ध दशमी प्रशस्त होती है। अपराह्न काल, श्रवण नक्षत्र तथा दशमी का प्रारम्भ विजय यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त माना गया है, लेकिन इस बार 4 और 5 अक्टूबर, अर्थात दोनों ही दिन विजयदशमी के लिए पूर्ण नहीं मिल रहे हैं। आइए इस जानकारी को समझें आचार्यों के माध्यम से-

ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर त्रिपाठी

जानें क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य

अर्थात अगर इस बार 4 अक्टूबर को अगर दशहरा (विजयदशमी) मनाते हैं तो नवमी लगी हुई दशमी तिथि तो मिलेगी, लेकिन श्रवण नक्षत्र और प्रदोष व्यापिनी नहीं है। ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर त्रिपाठी बताते हैं कि 4 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 15 मिनट के बाद दशमी लग रही है। अर्थात 4 को ही दशहरा होगा, लेकिन इस दिन श्रवण नक्षत्र और प्रदोष व्यापिनी का योग नहीं मिल रहा है। ये दोनों योग 5 अक्टूबर को मिल रहे हैं, लेकिन 5 अक्टूबर को नवमी विद्ध दशमी नहीं मिलेगी।

यहां तक कि जिस समय रावण दहन होगा, उस समय दशमी नहीं होगी बल्कि एकादशी लग चुकी होगी। हालांकि सनातन धर्म में त्योहारों के लिए उदयातिथि का मान माना गया है। अर्थात अगर उदयातिथि में दशमी मिल रही है तो पूरा दिन दशमी मान ली जाती है। इसलिए 5 अक्टूबर को भी दशहरा मनाया जा सकता है। हालांकि दोनों दिन दशहरा मनाया जाएगा। जो लोग जिस पंचाग को मानते होंगे, उसी के अनुसार दशहरा मनाएंगे। इसी तरह आचार्य महादेव भी महावीर पंचांग के मुताबिक बताते हैं कि दशहरा 4 अक्टूबर को ही है।

तो वहीं उज्जैन के आचार्य कमलकांत कुलकर्णी बताते हैं कि विजया दशमी का त्यौहार 5 अक्टूबर, दिन बुधवार को मनाया जाएगा।

आचार्य विनोद कुमार मिश्र

वहीं आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि विश्व पंचांगम् वाराणसी (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय,वाराणसी द्वारा प्रकाशित) के अनुसार नवरात्र में किसी तिथि का कोई लोप नहीं है। सभी तिथियां पूर्ण हैं । 03 तारीख को अष्टमी 04 को नवमी और 05 को दशहरा है। अष्टमी का व्रत पूजा 03 को नवमी का 04 को व दशहरा 05 को मनाया जाएगा।

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि 5 अक्टूबर को ही दशहरा मनाया जाएगा।

इस तरह से दशहरा पर्व को लेकर आचार्यों की अलग-अलग राय सामने आ रही है, तो वहीं देश भर के कई हिस्सों में 4 तो कई हिस्सों में 5 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। हालांकि आचार्यों का मानना है कि 5 अक्टूबर को ही दशहरा मनाएं, क्योंकि इस दिन उदयातिथि की दशमी के साथ ही नक्षत्रों का भी योग बन रहा है।