Kamada Ekadashi-24 July 2022: पापों से मुक्ति दिलाता है कामदा एकादशी व्रत, देखें पूजन विधि और ब्राह्मण व ठाकुर के जीवन से जुड़ी ये अद्भुत कथा, जानें इस एकादशी के अन्य नाम
श्रावण (सावन) कृष्ण एकादशी को कामिका अथवा कामदा एकादशी कहते हैं। इसे पवित्रा व कामिदा एकादशी भी कहा जाता है। आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन भगवान श्रीधर की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह ही स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान करा कर भोग लगाना चाहिए। फिर आचमन के बाद धूप, दीप, चंदन, नैवेद्य तथा तुलसी से भगवान की पूजन कर आरती उतारनी चाहिए। इस व्रत के करने से सभी कामनाओं की पूर्ती होती है और ब्रह्महत्या जैसे पापों से मुक्ति मिल जाती है।

कथा
प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक गांव में एक ठाकुर रहता था। वह क्रोधी स्वभाव का था। एक दिन ठाकुर की हाथापाई एक ब्राह्मण से हो गई, जिससे ठाकुर के हाथों ब्राह्मण की हत्या हो गई। इस पर ठाकुर ने उस ब्राह्मण की तेरहवीं क्रिया करनी चाही तो सभी ब्राह्मणों ने क्रिया में शामिल होने और भोजन करने के इंकार कर दिया। इस पर ठाकुर ने सभी ब्राह्मणों से निवेदन किया और पूछा कि “भगवन मेरा यह पाप किस प्रकार दूर होगा”, इस पर ब्राह्मणों ने सलाह देते हुए बताया कि तुम श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर पड़ने वाली कामदा एकादशी का व्रत करो और भगवान श्रीधर का पूजन करो और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराओ। तभी तुम्हारे पापों का प्रायश्चित होगा।

इस पर ठाकुर ने ब्राह्मणों के बताए विधि के अनुसार श्रीधर की पूजा पूरे मन से की। वह रात में जब भगवान की मूर्ती के पास सो रहा था, तभी भगवान ने उसे दर्शन दिए और कहा कि हे ठाकुर, तेरा ब्रह्महत्या का पाप दूर हो गया है। अब तुम उस ब्राह्मण की तेरहवीं क्रिया कर सकते हो, जो तुम्हारे हाथों से मारा गया था। तेरे घर से अब सूतक भी समाप्त हो गया है। इस पर उस ठाकुर ने भगवान के आदेश के अनुसार कार्य किया। इस तरह से वह ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त हो गया और सुखी जीवन बिताकर अंत में विष्णुलोक को गया।
जानें एकादशी व्रत के लाभ
आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि रविवार 25 जुलाई को एकादशी का व्रत रखें। एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है। जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है। जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है। एकादशी करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवार वालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं। इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है। धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है। कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बना रहता है। (विष्णु भगवान की फोटो भगवानफोटो.कॉम से ली गई है)
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)