Janmashtami: श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर केक काटना क्या सही है या गलत…? जानें क्या बोले प्रेमानंद महाराज-Video

August 14, 2025 by No Comments

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Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हिंदू धर्म में एक उत्सव की तरह मनाया जाता है. हर साल भादो मास की अष्टमी तिथि को यह त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को याद किया जाता है. इस दिन को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 16 अगस्त को मनाया जाएगा।

बता दें कि जन्माष्टमी पर भक्त तरह-तरह के भोग भगवान श्रीकृष्ण को लगाते हैं. उनको सोलह श्रृंगार करते हैं और सुंदर वस्त्र, आभूषण और फूलों से सजा कर विशेष पूजन करने के बाद भोग अर्पित करते हैं। समय के साथ ही तमाम चीजों में बदलाव देखा जा रहा है तो भोग में भी लोग बिस्कुट, चॉकलेट और केक तक चढ़ाने लगे हैं बल्कि कई इस्कॉन मंदिरों में तो चाउमीन, पास्ता आदि का भोग भी लगाया जाता है. तो वहीं केक काटकर श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाने वालों को मथुरा के संत व राधा भक्त प्रेमानंद महाराज ने एक संदेश दिया है जो कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

दरअसल एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि क्या केक काटकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाना चाहिए इस पर महाराज जी ने कहा कि अधिकतर बेकरी में अंडा युक्त और अंडा रहित दोनों तरह के केक बनते हैं। ऐसे में शुद्धता की गारंटी नहीं रहती. ऐसे केक का पूजा में इस्तेमाल उचित नहीं है। इसी के साथ वह ये भी कहते हैं कि जो लोग धार्मिक विधि-विधान से अनजान होते हैं, वे अपनी सुविधा अनुसार तरीकों का चयन कर लेते हैं लेकिन भोग में ऐसे किसी भी पदार्थ का उपयोग ठीक नहीं है. ये अभक्ष्य (धर्मशास्त्रों के अनुसार वर्जित) है।

ऐसा हो भगवान का भोग

प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि जन्माष्टमी पर भगवान को वही भोग लगाना चाहिए जो सात्विक हो। वह कहते हैं कि अगर श्रद्धा के साथ घर पर एक रोटी पर घी लगाकर भी भोग लगा दिया जाए, तो मात्र इसी से श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाएंगे। इसी के साथ ही वह ये भी कहते हैं कि पूजा में घर पर बनाए गए प्रसाद, जैसे पंचामृत, माखन-मिश्री, हलवा, पूरी, लड्डू या अन्य पारंपरिक व्यंजन का भी भोग लगाया जा सकता है.

वृंदावन आकर मनाएं जन्माष्टमी

इसी के साथ ही प्रेमानंद महाराज ने लोगों को संदेश दिया कि यदि वास्तव में जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाना चाहते हैं, तो वृंदावन आकर मनाएं।

 

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