Kushotpatni Amavasya-2023: कुशोत्पाटनी अमावस्या 14 सितम्बर को, जानें इसका महत्व, श्राद्धपक्ष से 15 दिन पहले करें पितरों का तर्पण
Kushotpatni Amavasya-2023: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कुशोत्पाटनी अमावस्या (Kushotpatni Amavasya) कहते हैं. इस बार यह अमावस्या 14 सितम्बर को पड़ रही है। यह दिन सनातन धर्म को मानने वालों के लिए बड़ा ही खास होता है, क्योंकि इस दिन को पितरों के तर्पण के लिए विशेष माना गया है। आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वैसे तो प्रत्येक अमावस्या को पितरों का तर्पण करने का विधान शास्त्रों में दिया गया है लेकिन श्राद्धपक्ष के 15 दिन पहले पड़ने वाली भाद्रपद मास की अमावस्या पितरों की पूजन व तर्पण के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है। इस दिन भी पितरों का तर्पण व पूजन विधि-विधान से किया जाता है।
इस दिन है कुशा तोड़ने का है विधान
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन पुरोहित व पुजारी लोग पूरे साल भर के कर्मकांड के लिए नदी, घाटियों, जंगलों से कुशा नामक घास उखाड़कर घर व मंदिर में लाते हैं। कुशा उखाड़ते वक्त ऊं हुं फट् मंत्र का उच्चारण किया जाता है। शास्त्रों में दस प्रकार की कुश बताया गया है। इसमें जो मिल जाए, उसे ही ग्रहण कर लेना चाहिए। जिस कुश का मूल सुतीक्ष्ण हो, जिसमें सात पत्तियां हों, अग्रभाग कटा न हो तथा हरा हो वह कुश देव व पितृ दोनों के कार्यों में उपयोग की जा सकती है।

कुशा से बनाई जाती है पैंती
कुशा नामक घास से पैंती बनाते हैं, जो कि उंगुठी के छल्ले की तरह होती है। इसे पैंती अथवा पवित्री कहते हैं। पूजा-पाठ के दौरान इसे दाहिने हाथ की उंगली में पहनकर पूजा-पाठ की जाती है। पितरों को तर्पण करते वक्त भी इसे उंगली में पहनकर अंजली में जल व काले तिल लेकर तर्पण कार्य किया जाता है। पूजा के दौरान पैंती का महत्वपूर्ण स्थान होता है.
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)