Vishwakarma Jayanti: इस मंत्र के साथ करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा…देखें आरती-Video

September 16, 2024 by No Comments

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Vishwakarma Puja: भगवान विश्वकर्मा को पौराणिक काल का सबसे बड़ा सिविल इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इसी परम्परा को निभाते हुए हर साल उनकी जयंती 17 सितंबर को मनाई जाती है।

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्‍वकर्मा ने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्‍वर्गलोक, लंका और जगन्‍नाथपुरी का निर्माण करवाया था। उन्‍होंने ही भगवान शिव जी का त्रिशूल, विष्‍णु भगवान का सुदर्शन चक्र तैयार किया था।

यही वजह है कि इंजीनियर और तकनीकी क्षेत्र से जुडे़ लोग विश्‍वकर्मा जी को अपना भगवान मानते हैं और हर साल विश्‍वकर्मा जयंती को हर्षोल्लास से मनाते हुए उनकी पूजा करते हैं और 17 सितम्बर को सभी औद्योगिक संस्थानों और कारखानों में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से व्यापार व उद्योग में तरक्की और प्रगति के रास्ते खुलते हैं। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी भगवान की पूजा करते हुए कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि, जिस किसी से भी निर्माण कार्य या फिर रचना की जा रही हो, उसकी पूजा विधि-विधान से करते हैं।

बड़े संस्थानों, कारखानों में हवन आदि भी कराया जाता है, लोग शस्त्र और औजारों की भी पूजा करते हैं। कहते हैं कि कलयुग में तो भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करना अत्यंत जरूरी है, क्योंकि आज के युग में आधुनिक कलपुर्जों, जैसे लैपटॉप, कम्प्यूटर, मोबाइल आदि के बिना आम लोगों का रह पाना मुश्किल है।

इस मंत्र का करें जाप

ओम आधार शक्तपे नम:
ओम् कूमयि नम:
ओम अनन्तम नम:
पृथिव्यै नम:

पूजा विधि

आचार्य पीएन पांडेय बताते हैं कि सबसे पहले विश्वकर्मा जयंती के दिन सुबह जल्दी उठें और फिर स्नानादि करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसी के साथ ही उन जगहों की भी सफाई करें जहां व जिन सामानों की पूजा करनी है. इसके बाद पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति को स्थापित करते हुए पूजा आरंभ करें। भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति के साथ संबंधित औजारों की पूजा करने का भी संकल्प लें। इसके बाद विधि-विधान और शास्त्रों में बताई गई पूजा विधि से अनुष्ठान प्रारंभ करें। भगवान विश्वकर्मा को पान, सुपारी, हल्दी, अक्षत, फूल, लौंग, फल और मिठाई अर्पित करें। फिर धूप और दीप जलाकर भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और रक्षासूत्र अर्पित करें. भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा के साथ कार्यालय की मशीनों और औजारों की पूजा करें। अंत में भगवान विश्वकर्मा से पूजा में भूलवश हुई किसी गलती के लिए माफी मांगें और कारोबार में उन्नति की प्रार्थना करें और प्रसाद का वितरण करें।

आरती

ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा।।

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।।

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई।।

रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना।।

जब रथकार दम्पत्ति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी।।

एकानन, चतुरानन, पंचानन राज।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे।।

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शामित पावे।।

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो नर गावे।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे।।

 
 
 
 
 
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DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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