अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LU का बढ़ा गौरव…एसोसिएट प्रोफेसर और सीनियर रिसर्च फेलो की अहम भूमिका
Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजलि गुलाटी एवं सीनियर रिसर्च फेलो हरमन इफ्तेखार ने चिकित्सा पुस्तकालयों की भूमिका पर महत्वपूर्ण शोध किया है. जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा है।
इनका संयुक्त शोधपत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय स्कोपस सूचीबद्ध शोध पत्रिका जर्नल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक रिसोर्सेज इन मेडिकल लाइब्रेरीज में प्रकाशित हुआ है। यह पत्रिका राउटलिज (Routledge), टेलर एंड फ्रांसिस समूह द्वारा प्रकाशित की जाती है तथा स्कोपस में सूचीबद्ध है। पत्रिका का वर्ष 2024 का साइटस्कोर 0.8 है। शोधपत्र 19 जुलाई 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित हुआ।
यह शोध लखनऊ के प्रमुख राजकीय चिकित्सा संस्थानों—किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (डॉ. आरएमएलआईएमएस)—में किया गया। अध्ययन में कुल 375 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें 307 एमबीबीएस विद्यार्थी, स्नातकोत्तर चिकित्सा विद्यार्थी, चिकित्सक, संकाय सदस्य तथा शोधार्थी सम्मिलित थे।
क्या रहा शोध का उद्देश्य
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजलि गुलाटी ने मीडिया को जानकारी देते हुए शोध के उद्देश्य के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह जानना था कि चिकित्सा पुस्तकालय स्वास्थ्य साक्षरता को बढ़ाने, स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक सूचनाओं की पहचान करने तथा साक्ष्य-आधारित रोगी देखभाल को मजबूत बनाने में किस प्रकार योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अध्ययन में पाया गया कि चिकित्सा पुस्तकालयों द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले डिजिटल सूचना संसाधन, ई-जर्नल, स्वास्थ्य साक्षरता कार्यक्रम तथा सूचना सेवाएँ चिकित्सा विद्यार्थियों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने में अत्यंत प्रभावी हैं।
वह बोलीं कि अधिकांश प्रतिभागियों ने माना कि पुस्तकालय सेवाएँ सही एवं भ्रामक चिकित्सा सूचनाओं के बीच अंतर करने, बेहतर चिकित्सकीय निर्णय लेने तथा गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
शोध में सूचना साक्षरता कार्यक्रमों के विस्तार, आधुनिक डिजिटल पुस्तकालय सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्षों को स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का अभिन्न अंग बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
यह उपलब्धि लखनऊ विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की अंतरराष्ट्रीय शोध क्षमता का प्रमाण है तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय चिकित्सा पुस्तकालयों की बढ़ती भूमिका को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है।