‘देश जैसा चाहता है…उसी भाषा में देंगे जवाब…’ पहलगाम हमले पर बोले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह -Video

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Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से ही देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल है और पूरा देश एक स्वर में पाकिस्तान पर अटैक करने की मांग सरकार से कर रहा है. हालांकि कूटनीति अपनाते हुए भारत सरकार लगातार पाकिस्तान की आर्थिक कमर तोड़ कार्रवाई कर रही है.

इस बीच रविवार यानी आज दिल्ली में संस्कृति जागरण महोत्सव में पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी और कहा कि देश के ऊपर आंख उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश के रक्षा मंत्री के तौर पर मेरी जिम्मेदारी है कि हमारी सीमा की रक्षा हो.

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने भाषण देते हुए आगे कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में जैसा आप चाहते हैं, वैसा होकर रहेगा. देश के लोग जो चाहते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुश्मन को उसी भाषा में जवाब देंगे. उन्होंने कहा कि एक रक्षा मंत्री के रूप में मेरा दायित्व है कि मैं अपने सैनिकों के साथ मिलकर देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करूं. उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को मिटा नहीं सकती है, भारत अमर रहेगा.

राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत की शक्ति केवल उसकी सैन्य ताकत में नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और अध्यात्म में भी है. इतिहास साक्षी है कि भारत के संतों ने केवल आध्यात्मिक उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए भी अग्रणी भूमिका निभाई है. इससे पहले उन्होंने कहा कि मेरा यह दायित्व है कि मैं अपनी सेना के साथ मिलकर देश पर आंख उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दूं.

इस मौके पर उन्होंने भारत के ऋषियों और मुनियों के लिए कहा, ”जहां एक तरफ, हमारे संत संस्कृति की रक्षा करते हैं तो वही दूसरी तरफ हमारे सैनिक, हमारे सीमाओं की रक्षा करते हैं. जहां एक तरफ हमारे संत, जीवन भूमि में लड़ते हैं तो वहीं दूसरी तरफ हमारे सैनिक रण भूमि में लड़ते हैं.” वह आगे बोले कि भारत वह भूमि है, जिसे हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने विचारों से सींचा है. यह बिल्कुल सत्य बात है, लेकिन इसके साथ-साथ, यह भी सत्य है कि भारत की आत्मा यदि ऋषियों ने रची है तो उस आत्मा की रक्षा हमारे वीरों ने की है.

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि इतिहास साक्षी है कि भारत के संतों ने केवल आध्यात्मिक उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए भी अग्रणी भूमिका निभाई है.

इतिहास साक्षी है, कि भारत के संतों ने केवल आध्यात्मिक उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए भी अग्रणी भूमिका निभाई है. आप सब तो जानते ही हैं, कि प्रधानमंत्री ने पूरे देश को, 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है।

स्वाभाविक है कि यह लक्ष्य कोई छोटा लक्ष्य नहीं है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, हमें हर तरह से मजबूत होना होगा. हमें यह भी ध्यान रखना है, कि सही मायने में हम एक विकसित राष्ट्र तभी होंगे, जब हम इन चीजों के साथ-साथ नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त होंगे.

भारत में अध्यात्म और आधुनिकता का तालमेल कोई नई बात नहीं है। हम शायद दुनिया में एक मात्र ऐसे देश हैं, जिसने भौतिकता और धर्म के बीच में संतुलन बनाकर रखा है.

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