Raksha Bandhan-2025: रक्षाबंधन पर भद्रा का साया…? सुबह से इतने बजे तक बांध लें राखी; जानें शुभ मुहूर्त

August 7, 2025 by No Comments

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Raksha Bandhan-2025: प्रत्येक वर्ष की श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर भाई बहन को समर्पित रक्षाबंधन का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है. हिंदुओं का यह पावन त्योहार इस बार 9 अगस्त को पड़ रहा है. इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर रोली-चावल का तिलक लगाकर कलाई पर राखी बांधती हैं और मिठाई खिलाती हैं. तो वहीं भाई बहन को उपहार देने के साथ ही रक्षा का वचन भी देता है.

मान्यता है कि राखी सिर्फ एक धागा नहीं बल्कि विश्वास, प्रेम और कर्तव्य का प्रतीक होती है. हालांकि हर साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया भी रहता है. दरअसल भद्रा के दौरान राखी बांधना अशुभ माना गया है लेकिन इस बार ऐसा संयोग बन रहा है कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं लगेगी.

इस सम्बंध में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद् पाराशर अवार्ड देहली सदस्य, अखिल भारतीय संत समिति, आचार्य कमलकांत कुलकर्णी ने बताया कि इस बार 8 अगस्त 2025 यानी शुक्रवार को दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से पुर्णिमा तिथि आरंभ होगी. इस दिन व्रत-पूजन करने वाले व्रत कर सकते हैं. तो वहीं 9 अगस्त दिन शनिवार को 1 बजकर 41 मिनट पर पूर्णिमा तिथि का समापन हो रहा है लेकिन उदयातिथि की वजह से रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को ही मनाया जाएगा. इस दिन श्रावणी कर्म (यजुर्वेदियों का उपकर्म) सुबह 7 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट करना शुभ रहेगा.

नहीं होगा भद्रा का प्रभाव

भद्रा को लेकर आचार्य कमलकांत कुलकर्णी ने कहा कि इस साल 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से मध्य रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर भद्रा समाप्त हो रही है. इसलिए इस बार किसी भ्रम में न पड़ें. क्योंकि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा.

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस साल 09 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा और इस साल कई वर्षों के बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा. इस वजह से इस साल का रक्षाबंधन बेहद शुभ होगा. इस बार रक्षाबंधन पर श्रवना नक्षत्र, सौभाग्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है. इस वजह से इस बार रक्षाबंधन का दिन महत्वपूर्ण हो गया है.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

सुबह 7 बजकर 40 मिनट से लेकर 9 बजकर 17 मिनट तक
दोपहर में 12 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम को 5 बजकर 25 मिनट तक
रात में 7 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 25 मिनट तक

जानें भद्रा क्या होती है?

धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के मुताबिक, भद्रा शनिदेव की बहन और भगवान सूर्य व माता छाया की संतान हैं। पौराणिक कथाओं का अगर मानें तो भद्रा का जन्म दैत्यों के विनाश के लिए हुआ था। जब भद्रा का जन्म हुआ तो वह जन्म लेने के फौरन बाद ही पूरे सृष्टि को अपना निवाला बनाने लगी थीं। इस तरह से भद्रा के कारण जहां भी शुभ और मांगलिक कार्य, यज्ञ और अनुष्ठान होते वहां विध्न आने लगता है। इस कारण से जब भद्रा लगती है तब किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। भद्रा को 11कारणों में 7वें करण यानी विष्टि करण में स्थान प्राप्त है।

वहीं वैदिक पंचांग की गणना की अगर मानें तो भद्रा का वास तीन लोकों में होता है। अर्थात भद्रा स्वर्ग, पाताल और पृथ्वी लोक में वास करती हैं। वैदिक पंचांग के मुताबिक जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में मौजूद होते हैं। तब भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर होता है। पृथ्वीलोक में भद्रा का वास होने पर भद्रा का मुख सामने की तरफ होता है। ऐसे में इस दौरान किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य को करना निषेध माना गया है और ये भी माना गया है कि इस दौरान किया गया कोई भी शुभकार्य फलदाई नहीं होता है और न ही सफल होता है. पौराणिक कथा में दी गई मान्यता के मुताबिक रावण की बहन ने भद्राकाल में ही रावण को राखी बांधी थी जिसके कारण रावण का भगवान राम के हाथों विनाश हुआ था.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)