Sanatan Culture: आर्थिक संकट से बचने के लिए तीन दिन करें ये उपाय, इन 18 नामों का करें जाप, भौतिक सुख के लिए घर का कुछ हिस्सा छोड़ दें कच्चा
सनातन संस्कृति मान्यताओं व परम्पराओं की संस्कृति है। ईश्वर पर अटूट विश्वास हमें भीतर से मजबूती देता है और यही विश्वास हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। ये सच है कि बिना नौकरी या रोजगार किए कोई भी धन अर्जित नहीं हो सकता, लेकिन कर्म के साथ ही अगर भक्ति मिल जाती है तो कर्म और भी शक्तिशाली हो जाता है और हमें अपने कार्यों में सफलता निश्चित ही मिलती है। इस लेख में आचार्य पंडित रवि शास्त्री आपको कुछ उपाय बता रहे हैं, जिनको कर्म के साथ करने पर सुख-शांति व धन की प्राप्त होगी और आर्थिक संकट भी कटेगा।
देखें उपाय
बुधवार को हरा चारा, ब्रहस्पतिवार को गीली चने की दाल को आटे में मिलाकर उसके 2 पेड़े और शुक्रवार को सफेद चावल मीठा डालकर गाय को खिलाने से उस घर पर कभी भी कोई भी आर्थिक संकट नहीं आता है।
आचार्य कहते हैं कि शुक्र ग्रह भौतिक सुख के कारक है , इसको मजबूत करने के लिए घर का कुछ हिस्सा कच्चा जरुर रखे ।
यदि गृह लक्ष्मी अर्थात पत्नी प्रतिदिन एक लोटा जल प्रात: घर के मुख्य द्वार पर डाले तो उस घर में धन का आगमन बहुत ही सुगमता से होता है।
माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए स्नान के पश्चात यदि मस्तक पर शुद्ध केसर का तिलक और इत्र लगाकर ही घर से अपने व्यवसाय में जाएँ तो धन लाभ की सम्भावना बढ़ जाती है।
मान्यता है कि रात को सोते समय अपने दन्त फिटकरी से साफ करें लाभ प्राप्त होगा।
इन्द्रकृत महालक्ष्मी स्तोत्र के 11 पाठ नित्य करने और गीताजी के ग्यारहवें अध्याय का नियमित पाठ करने से महालक्ष्मी उस घर में सदा निवास करती है।
श्रीसूक्त के रात्रि के समय 11 पाठ करने व एक पाठ से हवन करने से मां लक्ष्मी उस पर सदा प्रसन्न रहती है।
ध्यान रहे धन लक्ष्मी की पूजा करने वाले किसी भी हाल में स्त्री का अनादर नहीं करना चाहिए।
धन लक्ष्मी माता को सफेद पदार्थ जैसे चावल से बनी खीर और यथासंभव दूध से बने पकवानों का भोग लगाएं।

इन नामों का करें जाप
भगवती लक्ष्मी के 18 पुत्र माने जाते हैं। इनके प्रतिदिन अथवा शुक्रवार के दिन इनके नाम के आरंभ में ॐ और अंत में ‘नम:’ लगाकर जप करने से मनचाहे धन की प्राप्ति होती है। जैसे
ॐ देवसखाय नम:
ॐ चिक्लीताय नम:
ॐ आनंदाय नम:
ॐ कर्दमाय नम:
ॐ श्रीप्रदाय नम:
ॐ जातवेदाय नम:
ॐ अनुरागाय नम:
ॐ संवादाय नम:
ॐ विजयाय नम:
ॐ वल्लभाय नम:
ॐ मदाय नम:
ॐ हर्षाय नम:
ॐ बलाय नम:
ॐ तेजसे नम:
ॐ दमकाय नम:
ॐ सलिलाय नम:
ॐ गुग्गुलाय नम:
ॐ कुरूंटकाय नम:
यदि संभव हो सके तो इन्हे एक सफेद कागज पर लाल स्याही से लिख कर रख लें और पढ़ने के बाद इस कागज को चूमकर अपने माथे से अवश्य लगाएँ।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)