Sanatan Dharma: सोम प्रदोष पर भाग्योदय के लिए करें ये सरल उपाय, सदा बनी रहेगी शिवजी की कृपा, जानें प्रदोष व्रत का महत्व, देखें पूजा विधि
प्रदोश व्रत विशेष। सोमवार को प्रदोष व्रत पड़ने पर इस व्रत को सोम प्रदोष कहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक सोम प्रदोष व्रत का एक अलग ही महत्व होता है। आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस दिन शिव की विशेष पूजा की जाती है। इसीलिए जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो ये सोने पर सुहागा वाली बात होती है, क्योंकि सोमवार भोले बाबा का दिन माना जाता है।
पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान शिव, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें। भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसी से अपना व्रत भी तोड़ें। उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
भाग्योदय के उपाय
प्रातः शीघ्र उठकर स्नान आदि के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य दें। जल में श्वेतार्क के पुष्प जरूर मिलाएं। श्वेतार्क के पुष्प भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं। ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी होता है। इस उपाय को प्रत्येक सोम प्रदोष पर किया जा सकता है।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)