Gayatri Mantra: गायत्री मंत्र का जाप करते हुए रखें इन बातों का ध्यान, जानें इसके तीन अर्थ और जाप का सही समय, छात्रों के लिए है फलदायी

December 19, 2022 by No Comments

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सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथों में गायत्री मंत्र को सबसे प्रभावशाली मंत्रों में से एक माना गया है। इसे महामंत्र माना गया है। मान्यता है कि गायत्री मंत्र का उच्चारण करने और इसका अर्थ समझने से एक अलग तरह की आत्म अनुभूति तो होती ही है, साथ ही मन में आत्मविश्वास भी जागृत होता है। बताया जाता है कि गायत्री मंत्र का जाप करते वक्त कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। तभी इसका पूरा फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि दुनिया की पहली पुस्तक ऋग्वेद की शुरुआत इसी मंत्र से होती है। ब्रह्मा जी ने चार वेदों की रचना से पहले इस मंत्र की रचना की थी।

जानें क्या है गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र- “ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।”

इस समय करें गायत्री मंत्र का जप
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वेद-पुराणों में दिन में तीन ऐसे समय बताए गए हैं, जब गायत्री मंत्र का जाप उत्तम माना गया है। इसमें सबसे पहले समय सुबह सूर्योदय से कुछ देर पहले का माना गया है, जब गायत्री मंत्र का जाप शुरू करते हुए सूर्योदय के कुछ देर बाद तक करना चाहिए।

दोपहर में इस मंत्र को जपने का दूसरा उत्तम समय बताया गया है। इसी के साथ शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले मंत्र जाप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक इसका तीसरा समय बताया गया है। इसके अलावा गायत्री मंत्र का जाप कभी भी किया जा सकता है, लेकिन इसका जाप मौन रहकर करने में अधिक लाभ मिलता है। इसी के साथ जाप के समय एकाग्रता अति आवश्यक है।

जानें क्या है लाभ
मान्यता हैकि गायत्री मंत्र के लगातार उच्चारण से क्रोध शांत होता है और इंसान मानसिक रूप से मजबूत होता है। वहीं इसके उच्चारण से शरीर को जल्द ही किसी तरह की कोई बीमारी से आराम मिलने लगता है। मान्यता है कि इसके उच्चारण से शरीर में रक्त का संचार सुचारु रूप से होता है। इसी के साथ विद्यार्थियों व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी यह मंत्र काफी उपयोगी माना गया है। मान्यता है कि इसके जाप से स्मरण शक्ति बढ़ती है और धन के आगमन का मार्ग भी खुलता है।

जानें गायत्री मंत्र के अर्थ

पहला अर्थ

हम पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का ध्यान करते हैं। हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की तरफ चलने के लिए परमात्मा का तेज प्रेरित करे।

दूसरा अर्थ

उस दुःखनाशक, तेजस्वी, पापनाशक, प्राणस्वरूप, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में परमात्मा प्रेरित करे।

तीसरा अर्थ

ॐ: सर्वरक्षक परमात्मा, भू: प्राणों से प्यारा, भुव: दुख विनाशक, स्व: सुखस्वरूप है, तत्: उस, सवितु: उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक, वरेण्य: वरने योग्य, भर्गो: शुद्ध विज्ञान स्वरूप का, देवस्य: देव के, धीमहि: हम ध्यान करें, धियो: बुद्धि को, यो: जो, न: हमारी, प्रचोदयात्: शुभ कार्यों में प्रेरित करें।

जानें गायत्री मंत्र की शक्ति का राज
हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि अगर इस मंत्र का लगातार जाप किया जाए तो इससे मस्तिष्क का तंत्र बदल जाता है। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियां जपकर्ता से दूर चली जाती हैं। एक पौराणिक कथा की मान्यता के अनुसार, ऋषि विश्‍वामित्र ने इस मंत्र के बल पर ही एक नई सृष्टि का निर्माण किया था। इसी से पता चलता है कि यह मंत्र कितना शक्तिशाली है। ऐसा कहा जाता है कि इसके हर अक्षर के उच्चारण से एक देवता का आह्वान होता है।

गायत्री माता की आरती

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)