Sanatan Dharma: विवाह की तारीख निकालने से पहले जरूर जानें ये 6 बातें, ”शुद्ध लग्न का चयन” करते वक्त बरतें सावधानी, ताकि वर-वधू का जीवन रहे सुखी

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Sanatan Dharma: सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म में विवाह को जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है. इसके बिना व्यक्ति का जीवन अधूरा माना गया है. शास्त्रों में भी विवाह संस्कार को जीवन का अभिन्न अंग बताया गया है. इसीलिए सभी माता-पिता चाहते हैं कि समय रहते ही उनकी संतान का विवाह हो जाएस लेकिन कभी-कभी विवाह में तमाम अड़चने भी आती हैं. रिश्ते तो बहुत आते हैं लेकिन विवाह नहीं होता और अगरर हो जाता है तो वर-वधू का जीवन भर खुश नहीं रहते.

ऐसे में आचार्य पंडित रवि शास्त्री बताते हैं कि विवाह का मुहूर्त बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. विवाह मुहूर्त के निर्धारण में कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है लेकिन सबसे खास होता है श्रेष्ठ मुहूर्त ताकि विवाह करने वाले को किसी भी तरह का दोष न लगे. इसलिए विवाह के समय लग्न का निर्धारण बड़ी ही सावधानी से करें. विवाह लगन का निर्धारण करते समय कुछ बातों एवं ग्रह स्थितियों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है. जो जानें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

आचार्य बताते हैं कि ध्यान रखें कि विवाह लग्न में लग्न भंग योग नहीं होना चाहिए। इसके अलावा विवाह लग्न से द्वादश भाव में शनि, दशम भाव में मंगल, तीसरे भाव में शुक्र, लग्न भाव में पाप ग्रह या फिर क्षीण चंद्रमा स्थित नहीं होना चाहिए इसे भी अशुभ माना जाता है.

ज्योतिष के मुताबिक विवाह लग्न का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि विवाह का लग्न वर कन्या के जन्म लग्न व जन्म राशि से अष्टम राशि का न हो।

पं. रवि शास्त्री बताते हैं कि विवाह में लग्नेश,चंद्र व शुक्र अशुभ अर्थात 6,8,12 भाव में भी नहीं होने चाहिए।

इसके अलावा विवाह लग्न अंध, बधिर या पंगु नहीं होना चाहिए। मेष, वृषभ, सिंह, दिन में अंध, मिथुन, कर्क, कन्या रात्रि में अंध, तुला, वृश्चिक दिन में बधिर, धनु, मकर रात्रि में बधिर, कुंभ दिन में पंगु, मीन रात्रि में पंगु लग्न होती हैं किंतु ये लग्न अपने स्वामियों या गुरु से दृष्ट हों तो ग्राह्य हो जाती हैं।

जब शुद्ध लग्न की प्राप्ति ना हो तो गोधूलि लग्न की ग्राह्यता शास्त्र अनुसार बताई गई है। गोधूलि लग्न सूर्यास्त से 12 मिनट पूर्व एवं पश्चात कुल 24 मिनट होती है।कुछ विद्वान इसे सूर्यास्त से 24 मिनट पूर्व पश्चात कुल 48 मिनट मानते हैं।

अगर शास्त्र की बात की जाए तो उसमें स्पष्ट निर्देश है कि गोधूलि लग्न की ग्राह्यता केवल आपात परिस्थिति में ही होती है।।विवाह के दौरान जहां तक संभव हो शुद्ध लग्न को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। शुभ फल प्राप्त होते हैं।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति में प्रमाणिक ज्योतिषियों से ही परामर्श लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)