Solar Eclipse 2022 : कुछ समय बाद लगने वाला है खंडग्रास सूर्य ग्रहण, जल्दी से जान लें ये महत्वपूर्ण जानकारी, इन मंत्रों का करें जाप, गर्भवती पास में रखें कुश व तुलसी दल, ग्रहण समाप्त होने के बाद करें ये कार्य

October 25, 2022 by No Comments

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सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) विशेष। दीपावली के दूसरे दिन 25 अक्टूबर, दिन मंगलवार की शाम को 4:42 से 5:22 तक है। अर्थात सूर्यास्त के साथ ही ग्रहण भी समाप्त हो जाएगा। भारत समेत यूरोप, उत्तरी-पूर्वी अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देशों में सूर्यग्रहण दिखाई देने वाला है। आचार्य विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि भारत के पूर्व भाग को छोड़कर पूरे भारत में सूर्य ग्रहण दिखेगा और जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, वहां पर नियम पालनीय है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के विभिन्न जगहों से मंगलवार की शाम 4 से 6 बजे के बीच खंडग्रास सूर्यग्रहण दिखाई देगा। साल के आखिरी सूर्यग्रहण पर रात 3 बजकर 30 मिनट के बाद से ही सूतक लगने के कारण हिंदू मान्यताओं के मुताबिक भोर से ही मंदिरों के कपाट बंद हैं और पूजा-पाठ सूर्यग्रहण समात्पत होने के बाद ही शुरू होगा। इस लेख में आपको बताते हैं कि आखिर ग्रहण के दौरान सूतक लगने पर क्यों मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं।

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि ग्रहण पर यह भी मान्‍यता है कि ग्रहण काल पर भोजन आदि खाद्य पदार्थों में भी तुलसी की पत्ती डाली जाती है। जिसके बाद ही उन्‍हें खाया जाता है। वहीं इस बार सूर्यग्रहण के कारण दीपावली के बाद आने वाले त्योहार गोवर्धन पूजा और भैया दूज की तिथियां आगे बढ़ गई हैं। अर्थात गोवर्धन पूजा, जो कि दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता था, इस बार एक दिन बाद मनाया जा रहा है। अर्थात गोवर्धन पूजा 26 और भैया दूज 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। बता दें कि सूर्यग्रहण का समय लखनऊ में 04:37 से 05:29 तक है सूर्य ग्रहण में सूतक काल 12 घंटे पहले प्रारम्भ होता है। सूतक काल में सोना , खान , यात्रा करना तथा गर्भवती स्त्रियों को कुछ भी काटना, पेड़ के पत्ते तोड़ना मना है। बाल,वृद्ध और रोगी के लिए नियम पालन आवश्यक नहीं है।

जानें क्या है हिंदू मान्यता
आचार्य पुष्पलता पाण्डेय बताती हैं कि हिंदू धर्म में ग्रहण को लेकर कुछ परंपराएं काफी प्राचीन समय से चली आ रही हैं। मंदिरों के कपाट बंद होना भी इसी में शामिल है। ग्रहण के दौरान मंदिरों के अलावा घर में मौजूद पूजा स्थल को भी कपड़ों से ढ़क दिया जाता है। इसके पीछे मान्यता ये है कि ग्रहण के दौरान दैवीय शक्तियों का प्रभाव कम हो जाता है और असुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए इस दौरान पूजा पाठ करने की मनाही होती है। इस दौरान मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मौन अवस्था में रहकर मंत्र जाप करना चाहिए।

ये कार्य न करें ग्रहण के दौरान
ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए।
ग्रहण के दौरान सोना भी नहीं चाहिए।
ग्रहण के दौरान मौन अवस्था में रहकर मंत्र जाप करते रहना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खास ध्‍यान रखना चाहिए।

इन मंत्रों का करें जाप
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं के बीज मंत्र, भगवान् विष्णु, गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इससे ग्रहण का प्रभाव कम हो जाता है। ग्रहण काल में गर्भवती नारियों को अपने पास कुश और गंगा जल रखकर मंत्रों का जाप मन में करना चाहिए। भगवान की प्रतिमा को स्पर्श ना करें। दिवाली की रात को एवं ग्रहणकाल को मंत्र साधना, तंत्र साधना सिद्धि के लिए के लिए बहुत ही उत्तम माना गया है। इस समय मंत्र साधना, तंत्र साधना जल्द सफल होती है ।

ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ
गायत्री मंत्र ‘ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

सूर्य का तंत्रोक्त मंत्र-
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम

ग्रहण समाप्त होने के बाद करें ये कार्य
ग्रहण मंगलवार को लग रहा है, इसलिए सूर्यग्रहण की स्थिति में गायत्री मंत्र, मृत्युंजय मंत्र, हनुमान चालीसा का जाप करना चाहिए। भोजन सामग्री में कुश रखें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करना चाहिए। गंगाजल का पूरे घर में छिड़काव करें। सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य मंत्र का जाप करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। शिवपुराण में उल्लेख किए गए इस मंत्र के जप से आदि शंकराचार्य को भी जीवन की प्राप्ति हुई थी।