जीवन में सत्य, प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलें. यह कथा हमें केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारने के लिए है.
जो उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन होंगे। उन्हें ऐसे कार्यस्थलों का अनुभव कराया जाएगा, जो दिव्यांग-अनुकूल हों।
मतलब साफ है कि मामले में अब नए सिरे से कार्रवाई आगे बढ़ेगी और अब देखा ये है कि जांच के बाद क्या जानकारी सामने आती है.
नोविस श्रेणी में शिवांश सिंह कश्यप और देवेश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। WGM श्रेणी में आयुषी भोसले और मेगर बिष्ट विजेता रहे।
महिला इंटर कॉलेज में और पति प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं और रात में लूट को अंजाम देते थे.
यह सत्र सशक्तिकरण का माध्यम बना, जिसमें प्रतिनिधित्व और समानता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई.
न पूछो प्यास मिट्टी की, जो बरसें प्रेम की बूंदें, चटकती भूमि के भीतर मिलन की भोर हो जाए…” सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया.
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विद्वानों ने व्याख्यान व्याख्यान दिए, शोधकर्ताओं ने शोध पत्रों की प्रस्तुतियां दी
इसी क्रम में आज की अध्यक्षता कर रहे आरपी दुबे ने अपने मुक्तक एवं गजल से सभी को भाव विभोर किया.