माना जाता है कि इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है।
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा के साथ अश्विनी कुमारों को भी खीर का भोग लगाना चाहिए.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि, मान्यता है कि रासोत्सव का यह दिन वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण ने जगत की भलाई के लिए निर्धारित किया था।
इस बार शरद पूर्णिमा को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कोई 16 तो कोई 17 अक्टूबर को पूर्णिमा होने की बात कह रहा है.
गया में 17 सितंबर से पितृपक्ष मेला आयोजित किया जा रहा है. यह मेला 2 अक्टूबर तक चलेगा.
जोगे और भोगे दो भाई थे. जोगे बहुत ही धनवान था तो वहीं भोगे बहुत ही गरीब था.
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