Indira Ekadashi Katha: प्राचीनकाल में महिष्मती नगरी में इंद्रसेन नामक राजा राज्य करते थे. उनके माता-पिता का निधन हो चुका…

इसके बाद भीष्म तर्पण के लिए दक्षिणाभिमुख हो कर पितृतर्पण की तरह ही जनेऊ अपसव्य करके हाथ में कुश धारण किये हुए ही बालब्रह्मचारी भक्तप्रवर भीष्म के लिए पितृतीर्थ से तिलमिश्रित जल के द्वारा तर्पण करें। उनके तर्पण का मन्त्र जो कि नीचे दिया गया है बोलें-

श्राद्ध कर्म के लिए काले तिल, जौ या सत्तू, चावल, कुश (दर्भ घास), जल (गंगाजल हो तो बहुत ही अच्छा है), फूल, दूध, दही, घी और शहद होना चाहिए।