Indira Ekadashi: तर जाते हैं सात पीढ़ियों के पितर…इंदिरा एकादशी पूजा में जरूर करें तुलसीदल का इस्तेमाल- Video
Indira Ekadashi: अश्विन कृष्ण एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. पित-पक्ष के दौरान पड़ने वाली इस एकादशी का बहुत ही अधिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि ये एकादशी भटकते हुए पितरों को गति देने वाली होती है. इसीलिए इसका नाम इंदिरा एकादशी है। इस एकदशी का व्रत करने वाले के सात पीढ़ियों तक के पितर जाते हैं। इस एकादशी का व्रत करने वाला स्वंय मोक्ष प्राप्त करता है। इस बार इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को है.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस एकादशी के व्रत और पूजा का विधान वही है जो अन्य एकादशियों के होते हैं लेकिन अंतर केवल इतना है कि इस दिन शालिग्राम की पूजा की जाती है। प्रात:काल स्नानादि से पवित्र होकर भगवान शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराकर भोग लगाना चाहिए तथा पूजा कर, आरती करनी चाहिए।
इसके बाद पंचामृत वितरण कर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देनी चाहिए. इस दिन पूजा तथा प्रसाद में तुलसी दल का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से पितर प्रसन्न होते हैं और पीढ़ियों को ढेरों आशीर्वाद देते हैं.
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