UGC के नए नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक भारी प्रदर्शन…बवाल बढ़ने पर सरकार की सफाई आई सामने -Video

January 27, 2026 by No Comments

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UGC New Rule: यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC)के नए नियमों को लेकर देश भी में भारी बवाल मचा हुआ है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन जारी है. आज लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी भारी विरोध किया तो वहीं देश के तमाम हिस्सों में सवर्ण एकजुट होकर इसका विरोध कर रहे हैं.

यूजीसी नियमों के खिलाफ दिल्ली में भी आज प्रदर्शन हुआ है. इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर सामने आ रही है कि यूजीसी के नियमों पर सरकार बहुत जल्द फैक्ट जारी करेगी. सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार यूजीसी विवाद पर भरोसा जारी करेगी. सोशल मीडिया पर सरकारी सूत्रों के बयान वायरल हो रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि यूजीसी नियमों को लेकर किसी भी सूरत में इनका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा.

फैलाया जा रहा है भ्रम

सरकारी सूत्रों के हवाले से वायरल खबरों की मानें तो सरकार का कहना है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा है. इसलिए सरकार जल्द ही इस बारे में स्थिति स्पष्ट कर सकती है.

जानें क्या है यूजीसी नए नियम?

बता दें कि इसी महीने यानी 15 जनवरी को यूजीसी के ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026’ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) में कुछ नए नियम जोड़े गए हैं. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इसको वापस लेने की मांग की जा रही है. इस पर लगातार विवाद गहराता जा रहा है. यहां तक सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ पीआईएल भी दाखिल कर दी गई है. कहा जा रहा है कि यूजीसी का नया नियम सवर्णों के खिलाफ है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूजीसी के इन नियमों को उच्च शिक्षा संस्थानों लागू किया गया है. कहा जा रहा है इसे जातिगत भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए लागू किया गया है. यूजीसी का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में SC/ST/OBC वर्ग के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की बढ़ोतरी देखी गई है. साल 2019-20 में 173 शिकायतें मिली थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं. UGC का कहना है कि ये आंकड़े नियमों की जरूरत साबित करते हैं.

बजट सत्र से पहले आए इस नियम पर भारी बवाल देश भर में हो रहा है. इस पर सरकार ने जनता पर भरोसा बनाने के लिए कहा है कि इन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और भ्रम फैलाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. तो वहीं सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि ये नियम सभी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए निष्पक्ष और सुरक्षित परिसर बनाने के उद्देश्य से हैं, न कि किसी वर्ग के खिलाफ.

शिक्षण संस्थानों में बनेगी एक कमेटी

यूजीसी के नए नियमों के तहत हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज यानी हायर शिक्षण संस्थानों में एक  इक्विटी कमेटी बनानी होगी जो कि एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी. कमेटी में एससी-एसटी के साथ ही ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना भी अनिवार्य किया गया है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाने और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना है.

ये लोग कर रहे हैं विरोध

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देश भर में सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी जिसमें ब्राह्मण के साथ बनिया और ठाकुर आदि जाति वर्ग से आने वाले लोग भारी प्रदर्शन कर रहे हैं. वे आरोप लगा रहे हैं कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ हैं. क्योंकि इसमें केवल SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात ही कही गई है और जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है यानी जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ कोई झूठा आरोप भी लगा दिया जाएगा तो उसे दोषी मान कर कार्रवाई कर दी जाएगी.

यानी इन नियमों का फायदा उठाकर अगर कोई भी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है. तो सवर्ण छात्र की सुनी भी नहीं जाएगी और उस पर कार्रवाई कर दी जाएगी.

इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर गया गया है कि ये UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ है. विरोध करने वालों का आरोप है कि इससे भेदभाव कम नहीं होगा बल्कि ज्यादा हो सकता है. फिलहाल अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो वहीं इसके खिलाफ देश में लगातार प्रदर्शन जारी है.

विपक्ष को मिला मुद्दा

इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में जमकर चर्चा हो रही है. हालांकि एससी, एसटी और ओबीसी का वोट साधने के लिए विपक्षी दल भी अभी खुलकर इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि संसद के बजट सत्र से पहले विपक्ष इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है. तो वहीं इसको लेकर मंत्रालय सभी भ्रांतियों को दूर करने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी कर सकता है.

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