आये हैं ऋतुराज सखी…बासंती काव्य गोष्ठी में गूंजी बसंत कविताएं

January 25, 2026 by No Comments

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Kanpur: साहित्यकार सहयोग संगठन की नव वर्ष की बासंती काव्य गोष्ठी का आयोजन उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के संकट मोचन विजय हनुमान एवं श्री दुर्गा मंदिर में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्री गणेश जी, सरस्वती पूजन और शिव आराधना के साथ हुई। डॉ रश्मि कुलश्रेष्ठ ने वाणी वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर डॉ सुषमा सेंगर, डॉ गायत्री सिंह, निधि मद्धेशीया, डॉ रश्मि कुलश्रेष्ठ, अजय कुलश्रेष्ठ, अजीत राठौर, अनिल मधुकर, जयराम सिंह गौर, संजीव मिश्र, डॉ राधा शाक्य, मधु मोहिल, मनीष मीत,ओम प्रकाश पाठक, रीता सिंह, शैलजा शुक्ला, गोपी कृष्ण बाजपेयी, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, महेंद्र मधुकर, सुरेश साहनी, सुनीता तिवारी, श्री हरि वाणी आदि ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।

मंदिर की कमेटी, बटुक, वेद पाठी ब्राह्मण, सेवादार महिला मंडल की अध्यक्ष नीलम चौहान रेनू शुक्ला, मधु मिश्रा, विनीत गुप्ता सुषमा कुशवाहा आदि महिला मंच की सदस्यों ने बढ़कर हिस्सा लिया। संगठन की तरफ से समाज सेवी वीरेंद्र चौहान को पटका पहना करके स्वागत किया गया। अमित मिश्रा, मयंक गुप्ता, राम बहादुर सिंह ने आए हुए सभी सदस्यों का स्वागत किया।

वैवाहिक मंच के संचालक वीरेन्द्र चौहान ने सभी का स्वागत और जलपान कराया और गणतंत्र दिवस के 26 जनवरी गुरुकुल आश्रम कार्यक्रम के लिए सभी को सादर आमंत्रित किया। अध्यक्ष डॉ गायत्री सिंह ने अपने आभार संबोधन में कहा कि हम सभी का दायित्व है कि गुरुकुल और मंदिर की आवश्यकताओं में सक्रिय भागीदारी निभायें। संयोजक डॉ सुषमा सेंगर ने अगली गोष्ठी के आह्वान के साथ सभी को उपस्थित होने के लिए धन्यवाद किया।

ये कविताएं पढ़ी गईं

डॉ रश्मि कुलश्रेष्ठ -आये हैं ऋतुराज सखी
डॉ सुषमा सेंगर -आया ये मधुमास तो सबके दिखे चरित्र !
वन में नाचे मेनका झूमें विश्वामित्र!
मनीष मीत-बेटियाँ ऐसी होती है !
अजीत राठौर -हम चींटी नहीं मारते ,
हम बकरी नहीं मारते हम पहिया भी नहीं मारते बछिया को तो पूजते हैं, पूंछ पकड़ कर भाव सागर पार करने की सोचते हैं, पर न जाने कौन सा जुनून भर गया है इस शरीर में कोख में पल रही बेटियों को चुन-चुन के मारते हैं!

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