Dussehra-2022: किसी भी कार्य में ‘विजय’ चाहिए तो दशहरे पर अवश्य करें शमी वृक्ष की पूजा, इस मुहूर्त में करें अस्त्र-शस्त्र, वाहन और सरस्वती पूजन, विजयदशमी की कथा में जानें भगवान शिव ने क्या बताया है शमी का महत्व
विजयदशमी विशेष। सनातन धर्म में जिस तरह से रक्षाबंधन, दीपावली और होली के त्योहार का महत्व है, उसी तरह दशहरे का भी महत्व माना गया है। इसी दिन भगवान राम ने रावध का वध किया था और माता सीता के सम्मान की रक्षा की थी। इसीलिए प्रतीक के रूप में प्रत्येक वर्ष दशहरे के दिन रावण के पुतले का वध करके समाज में ये संदेश दिया जाता है कि बुराई कितनी ही ताकतवर क्यों न हो, लेकिन सच्चाई के आगे टिक नहीं सकती। इस दिन को लेकर सनातन धर्म में और भी कई मान्यताएं हैं।
चूंकि इस दिन को विजयदशमी भी कहा गया है, इसीलिए इसी दिन विजय दिलाने वाले शमी के पेड़ की पूजा की भी परम्परा चली आ रही है। यह क्षत्रियों का बड़ा पर्व माना गया है। इस दिन ब्राह्मण सरस्वती तो क्षत्रिय शस्त्र पूजन करते हैं। इस दिन घोड़ों और वाहनों की भी पूजा की जाती है। इस दिन शाम को नीलकंठ के दर्शन करना शुभ माना गया है। इस पर्व के लिए श्रवण नक्षत्र, प्रदोश व्यापिनी एवं नवमी विद्ध दशमी प्रशस्त होती है। इस बार दशहरा 5 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। बंगाल में उस उत्सव को धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसीलिए काली पूजा होती है और मूर्तियों का विसर्जन भी नदियों में किया जाता है। आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि इस दिन शमी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
देखें मुहूर्त
आचार्य कमलकांत कुलकर्णी बताते हैं कि इस बार शस्त्र पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 10 : 30 से 12 बजे के मध्य है। तो वहीं सुशील कृष्ण शास्त्री बनारस विश्व पंचांग के मुताबिक बताते हैं कि चौघड़िया मुहूर्त ही सबसे मुहूर्त होता है, जो कि सुबह 10 बजकर 30 मिनट से लग रहा है और 12 बजे तक रहेगा। इसके बाद राहूकाल शुरू हो रहा है। इसी दौरान शस्त्र, बहीखाता, वाहन और सरस्वती पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा। अगर किसी वजह से इस समय पूजा नहीं कर सके हैं तो दोपहर में 3 बजकर 12 मिनट से लेकर शाम 6 बजे तक पूजा की जा सकती है।
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DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)