Karwa Chauth: करवा चौथ पर कहां से आई कढ़ी बनाने की परम्परा… भगवान कृष्ण से कैसे जुड़ा नाता?

October 19, 2024 by No Comments

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Karwa Chauth Kadhi: हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ मनाया जाता है. सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत-त्योहार काफी लोकप्रिय और खास है. ये तो सभी जानते हैं कि सनातन धर्म के हर पर्व-त्योहार-व्रत में किसी न किसी विशेष परम्परा व नियम को माना जाता है और पीढ़ी दर पीढ़ी उसका पालन भी किया जाता है.

इसी तरह करवा चौथ पर खाने के लिए कढ़ी बनाए जाने की परम्परा है. हालांकि इस पर्व पर कढ़ी के साथ ही दही-बड़े व अन्य पकवान बनाए जाते हैं और इसकी शुरुआत सरगी खाकर होती है. हालांकि कई जगहों व परिवारों में सरगी खाने की परम्परा नहीं देखी जाती है.

सुबह सरगी खा कर शुरू किया जाता है व्रत

करवा चौथ व्रत सुबह-सुबह यानी भोर में 4 बजे तक सरगी (Sargi) खाने की परम्परा से शुरू होता है. तो वहीं कई जगहों पर खासतौर से उत्तर भारत में इस दिन कढ़ी बनाने की परंपरा है. रात में व्रत खोलने के बाद अन्य पकवानों के साथ कढ़ी का होना अति जरूरी बताया गया है. मालूम हो कि उत्तर भारत में बेसन से कढ़ी बनाने की परम्परा प्रचलित है. यह बहुत ही स्वादिष्ट व्यंजन है और देश के विभिन्न राज्यों में इसे खाया-पकाया जाता है. हालांकि कई राज्यों में इसे अन्य तरीके से बनाया जाता है. इसमें बेसन की ही पकौड़ी डाली जाती है.

कढ़ी को धार्मिक दृष्टि से माना गया है शुभ

हिंदू धर्म (Hindu Dharm) यानी सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में पीले रंग को बहुत ही शुभ माना गया है. यही वजह है कि व्रत-त्योहार में पीले रंग के परिधान पहन कर पूजा करना व पीले रंग की चीजों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने को महत्व दिया गया है. पीले भोग, वस्त्र, फल, फूल भोग आदि के साथ ही पीले रंग के व्यंजनों का सेवन भी करना शुभ माना जाता है. चूंकि पूरी तरह से पीले रंग की होती है, इसीलिए करवा चौथ के दिन भी कढ़ी बनाना व खाना शुभ माना गया है. हालांकि इस दिन कढ़ी के साथ ही अन्य व्यंजन भी बनते है.

जानें कैसे जुड़ा है भगवान कृष्ण से संबंध?

शास्त्रों के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) को माखन व दूध, दही से बने पकवान के साथ ही मिश्री आदि जैसी चीजें अतिप्रिय थी. मान्यता है कि भगवान कृष्ण का प्रिय भोजन कढ़ी और चावल था. इसलिए श्रीकृष्ण की पूजा में उनको कढ़ी चावल का भोग लगाया जाता है. यह भोजन पूरी तरह से सादा होता है. इसीलिए कढ़ी को इस दिन बनाए जाने की परम्परा है.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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