Akshaya Tritiya: अक्षय फल पाने के लिए अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य से पहले करें ये काम…
Akshaya Tritiya: वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र त्योहार अक्षय तृतीया मनाया जाता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के भी किया जा सकता है.
इस दिन जरूरतमंदों के साथ ही ब्राह्मणों को दान अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन का किया गया दान-पुण्य सब अक्षय हो जाता है यानी पुण्य फल कभी भी नष्ट नहीं होता.
आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर विवाह, गृह – प्रवेश या वस्त्र -आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है।
वैशाख शुक्ल तृतीया की महिमा मत्स्य, स्कंद, भविष्य, नारद पुराणों व महाभारत आदि ग्रंथो में दी गई है। इस दिन किये गये पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो, अर्थात जो नष्ट न हो) व अनंत फलदायी होते हैं, अत: इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते है। यह सर्व सौभाग्यप्रद है।
इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं। उनका बड़ा ही श्रेष्ठ फल मिलता है। इस दिन विवाह आदि मंगल कार्यों के लिए किसी भी मुहूर्त को देखने की जरूरत नहीं पड़ती। कहते हैं इस दिन जो विवाह होता है वह अटूट रहता है।
दान-पुण्य करने से पहले इस दिन सप्तधान्य के जल से स्नान करना चाहिए. ऐसा करना पुण्यदायी है। पुष्प, धूप-दीप, चंदन अक्षत आदि से लक्ष्मी-नारायण का पूजन व अक्षत से हवन अक्षय फलदायी है।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन दिन अगर दान-पुण्य करने से पहले गंगा स्नान किया जाए और फिर पूजा करने के बाद दान किया जाए तो इसका अलग ही फल प्राप्त होता है. जो मनुष्य इस दिन गंगा में स्नान करता है, वह निश्चय ही सारे पापों से मुक्त हो जाता है।
दान करें ये चीजें
आचार्यों के मुताबिक, इस दिन स्वर्गीय आत्माओं यानी पितरों की प्रसन्नता के लिए कलश, घड़ी, पंखा, छाता, चावल, दाल, नमक, घी, चीनी, साग, इमली, फल, वस्त्र, खड़ाऊं, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा और दक्षिणा आदि का ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। इसके अलावा इसके आस-पास पड़ने वाली मेष संक्रांति में ब्राह्मणों को चीनी या गुड़ के साथ सत्तू का दान करना अति शुभ माना गया है. इस दिन सत्तू खाना भी चाहिए।
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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