Anant Chaturdashi-2025: अनंत चतुर्दशी पर इस मंत्र के साथ बांधें 14 गांठों वाला धागा…ऐसे करें पूजा; पढ़ें कथा

September 5, 2025 by No Comments

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Anant Chaturdashi-2025: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी व्रत किया जाता है. अनंत का मतलब है जिसके आदि ,अंत का पता न हो जो अनादि हो। सनातन धर्म में इस दिन व्रत रखा जाता है. इस दिन का अत्यंत महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान होने के कारण यह व्रत और भी फलकारी बन जाता है।

इस साल अनंत चतुर्दशी 06 सितंबर 2025 दिन गुरुवार को पड़ रही है. इस दिन 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का समापन होता है. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। इसी के साथ ही 14 गांठों वाला अनंत सूत्र भी बांधा जाता है. मान्यता है कि यह धागा चौदह लोकों का प्रतिनिधित्व करता है।

इस दिन भगवान विष्णु जी की उपासना, व्रत करने से सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्तों को भौतिक क्रियाकलापों से दूर होकर वेद ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। इस व्रत की पूजा दोपहर में की जाती है। इसलिए सुबह ही व्रती को स्नान आदि के बाद संकल्प लेकर इसका व्रत को शुरू कर देना चाहिए।

ऐसे करें पूजा

अनन्त चतुर्दशी पर पूजा की शुरुआत कलश स्थापना से करनी चाहिए। आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनन्त की स्थापना करनी चाहिए। इसके आगे कुमकुम, केसर, या हल्दी से रंग कर बनाया हुए कच्चे डोरे का चौदह गांठों वाला अनन्त भी रखा जाता है। कुश के अनन्त की वंदना कर के, उसने भगवान विष्णु का आह्वान करना चाहिए। इसी के साथ गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवैद्य आदि से पूजन करना चाहिए। इसके बाद अनन्त देव का ध्यान करके अनन्ता अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें। इस व्रत का पारण ब्राह्मण को दान करके करना चाहिए। अनन्त की चौदह गांठें चौदह लोकों (तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह) की प्रतीक मानी गई हैं। इसमें अनन्त भगवान विद्यमान होते हैं।

इस बात का रखें ध्यान

अनंत सूत्र हाथ में बांधते समय ध्यान रखना चाहिए कि पुरुष दाहिने और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में इसे बांधना चाहिए।

इस मंत्र के साथ करें पूजा

आचार्य बताते हैं कि अनंत सूत्र बांधते वक्त नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इसका अर्थ है ‘हे वासुदेव! अनंत संसाररूपी महासमुद्र में मैं डूब रही या रहा हूं। आप मेरा उद्धार करें, साथ ही अपने अनंतस्वरूप में मुझे भी आप विनियुक्त कर लें। हे अनंतस्वरूप! आपको मेरा बारम्बार प्रणाम है।

अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव।

अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते॥’

भगवान विष्णु ने इसी दिन रचा था 14 लोकों को

मान्यता है कि अनन्त चतुर्दशी के दिन व्रत व पूजा करने से दुखों व कष्टों का नाश होता है. 14 अंक का महत्व शास्त्रों में बताया गया है. परम्परानुसार इस दिन बांह पर 14 गांठों पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इस दिन 14 अंक का महत्व माना गया है. दरअसल इसी दिन भगवान विष्णु ने 14 लोकों को रचा था। यही नहीं इसे रचने के बाद संरक्षक और पालक के तौर पर जिम्मेदारी निभाने के लिए 14 रूप भी धरे थे. यही वजह है कि वह अनंत प्रतीत होने लगे और उनके इसी अनन्त रूप की पूजा आज के दिन की जाती है.

14 गांठों का संदेश

शास्त्रों के मुताबिक, 14 गांठों वाले रक्षासूत्र भूलोक, भुवलोक, स्वलोक, महलोक, जनलोक, तपोलोक, ब्रह्मलोक, अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातल, महातल और पताल लोक के प्रतीक हैं.

कथा

अनंत चतुर्दशी को लेकर जो कथा प्रचलित है, वो महाभारत काल से सम्बंधित है। मान्यता है कि राज्यहीन हो जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अनन्त की पूजा व व्रत करने की सलाह दी थी। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि यह व्रत करने से उन्हें उनका राज्य जरूर वापस मिलेगा। इस सम्बंध में जब युधिष्ठिर ने अपनी शंका को दूर करने के लिए पूछा था कि यह अनंत कौन हैं? तब श्रीकृष्ण ने कहा कि श्रीहरि के ही स्वरूप को अनन्त कहा गया है। इस व्रत को विधि विधान से करने से जीवन में आ रहे सभी तरह के संकट कट जाते हैं।

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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