UP News: शिक्षक MLC- 2023 के लिए हेमराज सिंह गौर को चुनकर घिरा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ, शिक्षकों ने शुरू किया विरोध, SIT की जांच के घेरे में हैं गौर, जानें क्या है मामला
लखनऊ/ कानपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने विधान परिषद निर्वाचन 2023 (शिक्षक MLC) के लिये सुरेश कुमार त्रिपाठी को प्रयागराज-झांसी खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से तथा हेमराज सिंह गौर को कानपुर-उन्नाव खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। यहां बता दें कि गौर के खिलाफ SIT 1984 के दंगों को लेकर जांच कर रही है। इस सम्बंध में हाल ही में समाचार पत्रों में खबरें भी प्रकाशित हुई थी, जिसमें हेमराज सिंह गौर का नाम भी सामने आया है।
प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अपर पार्लियामेन्टरी के बोर्ड की संस्तुति पर कानपुर- उन्नाव खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिये उप्र माध्यमिक शिक्ष संघ के प्रदेशीय मंत्री हेमराज सिंह गौर को प्रत्याशी घोषित किया गया। अपर पार्लियामेन्टरी बोर्ड में सुरेश कुमार त्रिपाठी, एमएलसी एवं अध्यक्ष, इन्द्रासन सिंह महामंत्री तथा सतीश कुमार शर्मा सदस्य, अक्षय कुमार राय सदस्य, श्रीकृष्ण यादव सदस्य, रामानुज तिवारी सदस्य, केदारनाथ दुबे सदस्य, रमेश चन्द्र शर्मा सदस्य, जगदीश नारायण त्रिपाठी सदस्य सम्मिलित थे। उप्र माध्यमिक शिक्षक के अध्यक्ष एवं विधान परिषद में नेता शिक्षक दल सुरेश कुमार त्रिपाठी, एमएलसी ने प्रयागराज-झांसी एवं कानपुर-उन्नाव खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षकों से एक जुट होकर संगठन के प्रत्याशियों के प़क्ष में मतदान की अपील की है।
इस सम्बंध में उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री एवं प्रवक्ता डा. आरपी मिश्र ने बताया कि प्रयागराज-झांसी खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सभी 10 जनपदों के अध्यक्ष एवं मंत्रियों ने उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी, एमएलसी को पुनः प्रत्याशी बनाये जाने का सर्व सम्मत प्रस्ताव पार्लियामेन्टरी बोर्ड के अध्यक्ष को प्रेषित किया। लोअर पार्लियामेन्टरी बोर्ड की संस्तुति पर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा सुरेश कुमार त्रिपाठी को प्रयागराज झांसी खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया।
जानें क्या है मामला
बता दें कि हाल ही में समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के मुताबिक सिख विरोधी दंगों में एसआईटी ने साल 2005 में सपा सरकार में मंत्री रहे रामस्वरूप सिंह गौर के भतीजे व शिक्षक नेता हेमराज सिंह गौर को भी आरोपित बनाया है। खबरों के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 31 अक्टूबर व एक नवम्बर 1984 को सिख विरोधी दंगों में कानपुर में 127 सिखों की हत्या हुई थी।

घटना में 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि 73 की गिरफ्तारी होनी अभी बाकी है। मीडिया को बयान देते हुए डीआईजी बालेंदु भूषण ने बताया था कि गवाहों के आधार पर हेमराज गौर का नाम गोविंदनगर क्षेत्र के दादानगर में हुए दो हत्याकांडों में सामने आया है। इनमें 6 लोग मारे गए थे। आरोप लगा है कि यह भीड़ गौर के नेतृत्व में ही वहां पहुंची थी। बता दें कि हेमराज गौर खालसा इंटर कॉलेज गोविंदनगर के प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वह दो बार शिक्षक MLC का चुनाव पहले लड़ चुके हैं, लेकिन हार गए थे। फिलहाल इस मामले में डा. आरपी मिश्र कहते हैं कि अगर आरोप सही होते तो संगठन उनको सपोर्ट नहीं करता।
यहां ये भी बता दें कि हाल ही में ये भी खबर समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थी कि सिख विरोधी दंगे में विशेष जांच दल (एसआईटी) का अंतिम बार दो महीने के लिए कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। 30 सितम्बर 2022 को एसआईटी का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। मीडिया को दिए बयान में डीआईजी एसआईटी सिख विरोधी दंगा बालेंदु भूषण ने बताया था कि कार्यकाल इसलिए बढ़ाया गया, क्योंकि कुछ गिरफ्तारियां शेष हैं। इसलिए 30 नवम्बर 2022 तक इसका कार्यकाल बढ़ा दिया गया है।

शिक्षक कर रहे हैं विरोध
हेमराज सिंह गौर का नाम शिक्षक एसएलसी के लिए सामने आने पर प्रदेश के तमाम जिलों में शिक्षकों ने दबी जुबान में विरोध करना शुरू कर दिया है। इस सम्बंध में हाल ही में समाचार पत्रों में भी खबरे प्रकाशित हुई हैं। शिक्षकों का कहना है कि जो दो बार चुनाव हार गए हैं, उन पर संगठन क्यों भरोसा कर रहा है। चुनाव हारने का मतलब तो यही है न कि शिक्षक गौर को पसंद नहीं करते हैं। इसी के साथ शिक्षकों ने कहा कि उनके खिलाफ जांच भी चल रही है। ऐसे में जिस पर सिखों की हत्या का आरोप लगा हो, भला संगठन ऐसे व्यक्ति का क्यों सपोर्ट कर रहा है?