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राधा अष्टमी पर मोरपंख घर ला सकते हैं. ये तो सभी जानते हैं कि भगवान कृष्ण के श्रृंगार में मोरपंख का विशेष स्थान माना गया है।

व्रत करने वाली महिलाएं रात्रिकालीन चार प्रहर की पूजा भी करती हैं और सुबह विसर्जन, दान, पुण्य करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है.

माता देवकी तो उनको लाला ही कहा करती थीं तो ब्रज की गलियों में लाला ही उनको कहा जाता है और मुरारी नाम से भी लोग बुलाते हैं.

इसी के साथ ही प्रेमानंद महाराज ने लोगों को संदेश दिया कि यदि वास्तव में जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाना चाहते हैं, तो वृंदावन आकर मनाएं।