Dev Uthani Ekadashi: देव उठनी एकादशी की पूजा पर जरूर पढ़ें ये कथा
Dev Uthani Ekadashi Katha: कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाते हैं. इस दिन भगवान विष्णु चार मास की निद्रा से जागते हैं. इसी दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन होता है. हालांकि कार्तिक पूर्णिमा को भी अधिकांश लोग तुलसी विवाह का आयोजन करते है. तो वहीं एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक तुलसी विवाह करने की परम्परा है. मान्यता है कि एकादशी पर अगर कथा न सुनी जाए तो व्रत और पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए पूजा के दौरान कथा जरूर सुनें या फिर पढ़ें.
देवउठनी एकादशी कथा
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि देवउठनी एकादशी को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान नारायण जी (विष्णु जी) से एक दिन लक्ष्मी जी ने कहा कि हे नाथ, आप दिन-रात जागा करते हैं और अगर सो जाते हैं तो लाखों-करोड़ों वर्ष तक के लिए सो जाते हैं। इसी के साथ उस समय सभी चराचर का नाश भी कर डालते हैं। इसलिए आप प्रतिवर्ष नियम से सोया करें। इससे मुझे भी कुछ समय के लिए विश्राम करने का समय मिल जाएगा। यह बात सुनकर नारायण जी मुस्कुराए और बोले कि देवी तुमने ठीक कहा। मेरे जागने से सभी देवों, खासकर तुम्हें भी कष्ट होता है। मेरी सेवा से जरा भी अवकाश तुम्हें नहीं मिलता। इसलिए तुम्हारे कहने पर मैं प्रतिवर्ष चार महीने वर्षा ऋतु के समय शयन करुंगा उस समय तुमको और देवगणों को अवकाश होगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और प्रलयकालीन महानिद्रा कहलाएगी। भक्तों को मेरी यह निद्रा मंगलकारी होगी। इस दौरान जो भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे मैं उनके घर में निवास करुंगा।
–Devuthani Ekadashi: भगवान विष्णु को जगाने के लिए बोले यें मंत्र… देवउठनी एकादशी पर न करें ये काम