Dhanteras-2025: इस बार धनतेरस पर बना ये विशेष संयोग…किन्नर से मांग लें सिक्का, होगा शुभ ही शुभ; पढ़ें पूजन मुहूर्त

October 17, 2025 by No Comments

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Dhanteras-2025: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हिंदू समाज धनतेरस का त्योहार मनाता है. धनतेरस दीवाली के आगमन का संदेश देता है क्योंकि इसी दिन से पांच दिवसीय दीवाली उत्सव का भी शुभारम्भ हो जाता है. इस बार द्वादशी तिथि शनिवार यानी 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे तक मानी जाएगी और इसी के बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी।

चूंकि धनतेरस शाम का पर्व है, इसलिए शनिवार को ही धनतेरस मनाया जाएगा. इस बाद इस दिन यम दीपम और शनि त्रयोदशी का विशेष संयोग बनने से ये दिन काफी खास हो गया है. इस दिन नए सामानों या फिर सोने-चांदी की खरीदारी करने से पूरे साल माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी.

सोशल मीडिया पर द्रिक पंचांग को लेकर आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री ने बताया कि द्वादशी तिथि का समय 17 अक्टूबर सुबह 11 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रहा है और 18 अक्टूबर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक द्वादशी तिथि रहेगी. इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी और धनतेरस मनाया जाएगा. शनिवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से शुरू हो रहा है और दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. तो वहीं राहुकाल का समय सुबह 9 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।

ऐसे करें कुबेर की पूजा

ज्योतिषाचार्य कमलकांत कुलकर्णी बताते हैं कि धनतेरस की पूजा का मुहूर्त इस बार शाम 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक है. इस दौरान माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा कर सकते हैं. धनतेरस पर शाम को 13 दीपक जलाकर भगवान कुबेर की पूजा करें साथ ही “यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा” मंत्र का जाप करें.
मान्यता है कि रात में 13 कौड़ियों को गाड़ने से धन लाभ होता है. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि धनतेरस पर घर के अंदर और बाहर 13-13 दीपक जलाने से नकारात्मक शक्ति का नाश होता है. इसलिए इस रात घर में कोने-कोने में 13-13 दीपक जलाएं.

माता लक्ष्मी को ऐसे करें प्रसन्न

धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा में लौंग अर्पित करें और सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चावल या कपड़े दान करें. मान्यता है कि ऐसा करने से धन की कमी नहीं होती. मान्यता है कि इस दिन अगर किन्नर को दान दें या फिर उनसे सिक्का मांगें तो ये भी शुभ होता है और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.

मान्यता है कि किसी पेड़ की टहनी लाकर घर में रखने और मंदिर में पौधा लगाने से भी घर-परिवार में समृद्धि आती है और सफलता मिलती है।

दक्षिणावर्ती शंख में जल छिड़कने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है.

यमराज को समर्पित जलाएं दीप

आचार्य बताते हैं कि धनतेरस के दिन शाम को यम दीपम जलाने की परंपरा है. इसलिए त्रयोदशी तिथि को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाएं। यह दीपक यमराज को समर्पित होता है. मान्यता है कि इससे यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं। इस दीपक को जलाते समय दीर्घायु और सुरक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए.

पुराणों में है शनि त्रयोदशी का उल्लेख

बता दें कि धनतेरस का दिन शनिवार को पड़ रहा है. यानी इस बार त्रयोदशी शनिवार को है. इसलिए यह शनि त्रयोदशी हो गई है. इसका उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण दोनों में मिलता है. आचार्यों को मुताबिक, यह व्रत चंद्र मास की दोनों त्रयोदशी को किया जाता है। अगर प्रदोष व्रत के दिन को देखें तो अगर प्रदोष सोमवार को पड़ता है तो उसे सोम व मंगलवार को पड़ने पर भौम व शनिवार को पड़ने पर शनि प्रदोष कहा जाता है. इसी तरह त्रयोदशी के लिए भी माना गया है. माना जाता है कि प्रदोश व्रत कई तरह की बाधाओं व संकट से मुक्ति दिलाने वाला होता है.

ज्योतिष सलाहकार अनुराग दीक्षित बताते हैं कि भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं. इसलिए प्रदोष व्रत शनि ग्रह से संबंधित दोषों जैसे कालसर्प दोष और पितृ दोष के निवारण के लिए भी अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव की कृपा से सभी ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है. साथ ही शनि देव की कृपा होती है जिससे कर्मबन्धन काटने में मदद मिलती है।

शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा करने का विधान है साथ ही शनि मंत्रों के जाप करना चाहिए और तिल, तेल व दान-पुण्य करने का विधान भी बताया गया है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो शनि की दशा से पीड़ित हैं.

तो इन संयोगों के साथ ही धनतेरस भी पड़ रहा है. यह पर्व त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में मनाया जाता है, जो सूर्यास्त के बाद करीब 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है. अनुराग दीक्षित कहते हैं कि धर्म शास्त्रों के मुताबिक, इस समय स्थिर लग्न, खासकर वृषभ लग्न में पूजा करना सबसे अधिक श्रेष्ठ व शुभ माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से विराजमान होती हैं.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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