Kalaratri Mata: सप्तम मां कालरात्रि को लगाएं गुड़ का भोग…कन्याओं को ये गिफ्ट देकर करें प्रसन्न
Kalaratri Mata: चाहे शारदीय नवरात्र हो या चैत्र नवरात्र, सप्तमी तिथि पर सप्तम मां कालरात्रि की एकाग्र होकर विधि-विधान से पूजा करें। मां की इस तरह से पूजा करने से भय से मुक्ति मिलती है। मां दुर्गा का सातवां विग्रह रूप मां कालरात्रि का है। इसीलिए शास्त्रों में नवरात्र की सप्तमी तिथि पर कालरात्रि माता की पूजा करने का विधान बताया गया है।
मां कालरात्रि का स्वरूप है इस तरह
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार मां कालरात्रि का सातवां विग्रह, घने अंधेरे की तरह एकदम गहरे काले रंग का है। माता के तीन नेत्र और सिर के बाल बिखरे हुए हैं। माँ के तीनों नेत्र ब्रह्मांड के गोले की तरह गोल हैं। उनके गले में बिजली की तेज जैसी छटा देने वाली सफेद माला सुशोभित हो रही है। माँ की भुजाएं चार हैं। उनका यह स्वरूप अत्यन्त भयानक है लेकिन माँ अपने भक्तों को शुभ फल ही प्रदान करती हैं। अगर मां के वाहन की बात करें तो वह गधे पर सवारी करती हैं।
भक्तों को देती हैं फल
मान्यता है कि मां का यह रूप भयानक जरूर है, लेकिन भक्तों के लिए शुभ फल देने वाला है। इसी कारण माँ को शुभंकरी भी कहा जाता है। योगी साधक माँ का स्मरण सहस्रार चक्र में ध्यान केंद्रित कर करते हैं। शास्त्रों के मुताबिक अपने भक्तों के लिए माता ब्रह्मांड की सभी सिद्धियों की प्राप्ति के लिए सभी मार्ग खोल देती हैं। विधि-विधान से माता का पूजन करने से साधक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
नकारात्मक शक्ति का करती हैं नाश
माँ के एक हाथ में चंद्रहास खडग और एक हाथ में कांटेदार कटार है तो वहीं अन्य दोनों हाथ वरमुद्रा व अभय मुद्रा में हैं। मां शक्ति का यह रूप नकारात्मक, तामसी और राक्षसी प्रवृत्तियों का विनाश करके भक्तों को दानव, दैत्य, राक्षस, भूत प्रेत आदि से बचाता है। मान्यता है कि माँ की उपासना से खराब ग्रहों द्वारा जो बाधाएं उत्पन्न की जाती हैं, वो भी दूर हो जाती हैं। माता भक्तों के भय को दूर करती हैं। जो भी मां कालरात्रि की शरण में आता है, उसे वह अग्नि, जल, जन्तु, शत्रु आदि के भय से मुक्त कर देती हैं।
कन्याओं को भेंट करें ये सामग्री
वैसे तो नवरात्र का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, लेकिन इस दिन गृहस्थों के लिए भी खास है। ऐसी मान्यता है कि सप्तमी की रात्रि को सिद्धियों की रात भी कहा जाता है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना से भक्तों के सारे दुख- दर्द दूर हो जाते हैं। माता शत्रुओं का नाश करने के साथ ही अशुभ ग्रहों के दोषों से भी मुक्ति दिलाती हैं। इस दिन माता को प्रसन्न करने के लिए गुड़ का भोग लगाना चाहिये। ऐसा करने से घर में दरिद्रता नहीं रहती। इसी के साथ माता को प्रसन्न करने के लिए कन्याओं को रुमाल और खुशबूदार कोई सामग्री या चीज उपहार में दें।
मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
आरती
कालरात्रि जय जय महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली ।।
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महा चंडी तेरा अवतार।।
पृथ्वी और आकाश में सारा।
महाकाली है तेरा पसारा ।।
खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ।।
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा।।
सभी देवता सब नर नारी ।
गावे स्तुति सभी तुम्हारी ।
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।
कृपा करें तो कोई भी दुख ना।।
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी।।
उस पर कभी कष्ट ना आवे।
महाकाली मां जिसे बचावे ।।
तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय।।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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