Pitru Paksha: पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष के दौरान करें ये 9 उपाय, प्रत्येक शाम को पीने का पानी रखने वाली जगह पर जलाएं घी का दीपक, रखें इस बात का खास ध्यान, गाय को खिलाएं हरा चारा, पढ़ें कथा
महालय स्पेशल। पितरों की पूजा के दिन शुरू हो गए हैं। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू हुए पितृपक्ष के दिन अमावस्या अर्थात 25 सितम्बर को समाप्त होंगे। चूंकि ये पितरों के दिन हैं, इसलिए इस दौरान लोग पितृ दोष से राहत पाने के लिए भी विधि-विधान से पूजा करते हैं। ताकि पितर प्रसन्न हों और उनके जीवन में आ रहे संकट को दूर करें। इन 15 दिनों के दौरान ही लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म करने के लिए गया, पुष्कर, हरिद्वार व प्रयागराज भी जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितरों के लिए इस दौरान किया गया कोई भी कार्य सीधे पितरों तक ही पहुंचता है।
इस लेख में आचार्य विनोद कुमार मिश्र आपको पितृदोष से राहत पाने के कुछ उपाय बता रहे हैं, जिनमें से किसी एक को आप चुनकर नियमित कर सकते हैं। आचार्य कहते हैं कि धर्म ग्रंथों के अनुसार, विधि-विधान पूर्वक श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वर्तमान समय में देखा जाए तो विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने में धन की आवश्यकता होती है। पैसा न होने पर विधिपूर्वक श्राद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसे में पितृ दोष होने से कई प्रकार की समस्याएं जीवन में बनी रहती हैं। पुराणों के अनुसार, ऐसी स्थिति में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर कुछ साधारण उपाय करने से भी पितर तृप्त हो जाते हैं।
देखें नौ उपाय, इनमें से किसी एक को अपनाएं
जिस स्थान पर आप पीने का पानी रखते हैं, वहां रोज शाम को शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इससे पितरों की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी, लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि वहां जूठे बर्तन नहीं रखे होने चाहिए। अर्थात इस जगह पर झूठे बर्तन कभी भी न रखें।
विष्णु भगवान के किसी मंदिर में सफेद तिल के साथ कुछ दक्षिणा (रुपए) भी दान करें।
गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उस पर गूगल के साथ घी, जौ, तिल व चावल मिलाकर घर में धूप करें।
कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में बहा दें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।
श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराएं या सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, सब्जी और दक्षिणा दान करें।
श्राद्ध नहीं कर सकते तो किसी नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृ दोष में लाभ मिलता है।
श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।
श्राद्ध पक्ष में किसी विद्वान ब्राह्मण को एक मुट्ठी काले तिल दान करने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।
सूर्यदेव को अर्ध्य देकर प्रार्थना करें कि आप मेरे पितरों को श्राद्धयुक्त प्रणाम पहुँचाए और उन्हें तृप्त करें।
पढ़ें कथा




DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)