Karwa Chauth 2025: करवा चौथ 10 अक्टूबर को… जानें सरगी खाने से लेकर चंद्रोदय तक का समय

October 3, 2025 by No Comments

Share News

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का व्रत-त्योहार सुहागिन महिलाओं का सबसे लोकप्रिय त्योहार है. वैसे तो प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी और चंद्रमा का व्रत किया जाता है लेकिन इसमें सबसे अधिक लोकप्रिय व्रत करवा चौथ का है. यह व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. 

इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा की पूजा करने के बाद व्रत का पारण करती हैं. साथ ही महिलाएं घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी गणेश जी और चंद्र देव से कामना करती हैं. मान्यता है कि इस व्रत से पति के करियर में तरक्की होने के साथ ही पति-पत्नी के जीवन में प्रेम और स्नेह सदा बना रहता है और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद भगवान से प्राप्त होता है।

हिंदू धर्म में करवा चौथ को प्रेम का प्रतीक माना गया है. कहीं-कहीं करवा माता की पूजा करने के बाद अन्न-वस्त्रों का दान करने की भी प्रथा है. इस दौरान व्रत का प्रारंभ ब्रह्म मुहूर्त में सरगी से किया जाता है. व्रती महिलाएं सुबह 4 बजे से पहले मायके से आई सरगी या फिर सास द्वारा दी गई सरगी खाने के बाद व्रत की शुरुआत करती हैं. सरगी के बाद व्रती महिलाएं दिन भर पानी तक नहीं पीतीं और चंद्रोदय के बाद पूजा करने के बाद ही व्रत खोलती हैं. हालांकि सरगी का चलन हर जगह पर नहीं है. देश के अधिकांश हिस्सों में बिना सरगी के ही सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं. 

करवा चौथ पर बन रहा है ये शुभ योग

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस बार करवा चौथ पर कृत्तिका नक्षत्र का योग बना रहेगा. ये शुभ समय शाम 5 बजकर 31 मिनट तक है। इसी के साथ ही सिद्ध योग का संयोग शाम 5:41 मिनट तक है। इसके अलावा व्यतीपात योग भी प्रारंभ हो रहा है. इस दिन चन्द्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। तो वहीं राहुकाल सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12:07 मिनट तक रहेगा। तो वहीं दिन का सबसे शुभ अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12:30 तक रहने वाला है।

चंद्रोदय का समय

करवा चौथ पर पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ हो रहा है जो कि 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। तो वहीं चंद्रोदय का समय शाम 07 बजकर 42 मिनट पर माना जा रहा है। अगर बदली होती है तो अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय पर चंद्रमा दिख सकता है. 

करवा चौथ की तिथि

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्तूबर को रात 10 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 10 अक्तूबर को रात 7 बजकर 38 पर हो रहा है। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार करवा चौथ 10 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा।

इस समय खाएं सरगी 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक करवा चौथ पर सरगी हमेशा ब्रह्म मुहूर्त में ही खाने का चलन है. 10 अक्तूबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह करीब 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 23 मिनट के बीच तक रहेगा। इस दौरान सरगी खाई जा सकती है.

पूजा विधि

करवा चौथ के दिन व्रती महिलाओं को  ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद सरगी (ड्राइ फ्रूट्स आदि) ग्रहण करना चाहिए।

इसके बाद बिना जल पिए व्रत की शुरुआत करें और फिर शाम को पूजा का मुहूर्त होने पर एक साफ चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखें।

एक साफ थाली में सिंदूर, दीपक, गंगाजल, अक्षत और हल्दी आदि के साथ ही फूल और गुड़ भी रखें। हालांकि अपनी-अपनी मान्यता के अनुसार पूजा थाली सजाएं. 

अब चौकी के पास एक नए कलश में साफ जल भरकर रखें और दीप प्रज्ज्वलित करें और धूपबत्ती जलाएं।

माता करवा पर जल छिड़क कर स्नान कराएं और फिर फल, हल्दी, अक्षत और ताजे फूल, भोग आदि अर्पित करें।

इसके बाद करवा चौथ के व्रत की कथा सुनें और गौरी जी से सुहाग लें सभी बड़ों से आशीर्वाद लें।

फिर चंद्रमा के निकलते ही उसे जल अर्पित कर चंद्रमा से अटल सुहाग की कामना करें. 

इसके बाद साफ नई छलनी के माध्यम से चंद्रमा देखें और फिर उसी से पति की ओर देखें। हालाकि कहीं-कहीं पर छलनी का रिवाज नहीं है. इस रस्म को आप अपनी मान्यता अनुसार करें. 

इसके बाद पति के हाथों से व्रत का पहला जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें और पति के साथ ही घर के सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।

इसके बाद सुहागिन महिलाओं को कुछ वस्त्र व अन्न दान करें और उनका आशीर्वाद लें। सास को भी दान दे सकती हैं. 

अंत में जाने अनजाने में हुई गलतियों की करवा माता से क्षमा मांगें। बता दें कि इस व्रत में करवा माता के साथ ही गणेश और गौरी जी की भी पूजा की जाती है. 

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

ये भी पढ़ें-Karwa Chauth Gift: हमेशा प्रसन्न रहेगी पत्नी और खुशहाल रहेगा दाम्पत्य जीवन…करवा चौथ पर राशि के मुताबिक दें गिफ्ट

Karwa Chauth Kadhi: जानें करवा चौथ पर कढ़ी बनाने की परम्परा कहां से आई? भगवान कृष्ण से इस तरह जुड़ा है नाता

Karwa Chauth Wishes: “करवा चौथ का पावन पर्व, अंतर्मन की दृश अद्भुत प्रीत…” अपनों को भेजें ये नए शुभकामना संदेश