यह एक औपचारिक पत्र है, न कि किसी सख्त कार्रवाई का प्रमाण।
सामान्य प्रशासन विभाग ने उनके कार्यालय लौटने का चार दिनों तक इंतजार किया लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए. इस पर उनको पहले वाट्सऐप के माध्यम से नोटिस भेजा गया.
सभी संगठनों ने बयान को ‘संविधान का अपमान’ और ‘सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाला’ बताया।
जब तक कि मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं कर दे या उससे संबंध नहीं बना दे.
उन्हें अच्छे लोग नहीं मिलते और वे मुझे इसलिए पसंद नहीं करते क्योंकि मैं सच बोलती हूं.
उनके इस बयान का कांग्रेस ने विरोध किया है तो वहीं तो वहीं उनकी खुद की पार्टी यानी भाजपा ने उनके इस बयान से किनारा कर लिया है.
बैठक में सरोज दुबे को कार्यकारिणी गठन करने का अधिकार भी दिया गया है.
Dewas: श्री कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज संचालक पं शरद दयाशंकर शुक्ला ने बताया कि कान्यकुब्ज ब्राह्यण समाज का वार्षिक स्नेह सम्मेलन…
इस बार महाशिवरात्रि 18 फरवरी दिन शनिवार को पड़ रही है. इसे देखते हुए मंदिरों में शुरू हो गई हैं तैयारियां
भोपाल। चाणक्य ब्राह्मण महासभा ने अनोखा काम करते हुए उन बुजुर्ग दम्पत्तियों का सम्मान किया, जिन्होंने वैवाहिक जीवन के 50…