कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु जी की पूजा के साथ ही भगवान शिव की पूजा का भी विधान है.
पहले दिन व्रती मात्र एक बार लौकी और चावल का भोजन करते हैं।
आपको माता लक्ष्मी दें इतना, दिन रात व्यापार बढ़ जाए दोगुना, भगवान विष्णु की भी बनी रहे कृपा, कुबेर जी आपके बैंक-बैलेंस को कर दें कई गुना.
इस पर भगवान ने किसान से कहाकि इन्हें कौन जाने देता है. लेकिन ये तो चंचला हैं, कहीं ठहरती ही नहीं है. इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके. इनको मेरा श्राप था.
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।।
धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति खरीदना बेहद शुभ होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
इस एकादशी को तुलसी एकादशी भी कहते हैं। ये तो सभी जानते हैं कि तुलसी पौधे की महिमा वैद्यक ग्रंथों के साथ-साथ धर्मशास्त्रों में भी बढ़-चढ़कर की गई है।
उसको तो शिष्टता से बात तक करनी नहीं आती है। भगवान क्या उसके साथ पढ़ेंगे। मैंने उसको वृंदावन में भी बहुत डांटा था।
कई दिनों के रखे हुए खोए को गरम कर उसे ताजा बनकर बेच दिया जाता है.
करवा चौथ के त्योहार को लेकर हर सुहागिनों का मन उमंग से भरा होता है. इस त्योहार के कई दिन पहले से ही सुहागिनें खरीदारी शुरू कर देती हैं.