Dhanteras Katha: धनतेरस कथा… माता लक्ष्मी को किसान के पास क्यों रहना पड़ा 12 साल?

October 28, 2024 by No Comments

Share News

Dhanteras Katha: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को हर साल धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. माना जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी, विष्णु जी और कुबेर की पूजा करने से पूरे साल धन-धान्य की कमी नहीं होती. तो वहीं एक प्रचलित पौराणिक कथा में माता लक्ष्मी ने खुद ही किसान को धनतेरस मनाने की विधि बताई थी. तो आइए जानते हैं क्या है कथा….

मान्यता है कि एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे. इस पर लक्ष्मी जी ने भी चलने के लिए आग्रह किया तो विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं, वैसे ही मानो तो चलो. इस पर लक्ष्मी जी ने हामी भर दी और फिर भगवान विष्णु जी धन की देवी माता लक्ष्मी जी के साथ भूमंडल पर आ गए. कुछ देर बाद एक स्थान पर भगवान विष्णु जी लक्ष्मी जी से बोले जब तक मैं न आऊं तब तक तुम यहां पर ठहरो. मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं.

तुम उधर मत देखना लेकिन विष्णु जी के जाने पर लक्ष्मी जी को कौतुक उत्पन्न हो गया और उन्होंने मन में सोचा कि आखिर भगवान स्वयं तो दक्षिण दिशा की ओर जा रहे हैं लेकिन मुझे देखने के लिए भी मना कर रहे हैं. लक्ष्मी ने विचार किया कि इसमें कोई तो रहस्य है. इसके बाद उनसे रहा नहीं गया और जैसे ही भगवान दक्षिण की ओर निकले वैसे ही लक्ष्मी जी भी उनके पीछे चल पड़ीं.

कुछ दूर पर ही सरसों का खेत लक्ष्मी जी को दिखा जो कि खूब फूला हुआ था. इस पर वह सरसों की शोभा देखकर मुग्ध हो गईं. जैसे ही आगे बढ़ीं कि उनको गन्ने (ईख) का खेत दिखाई दिया और लक्ष्मी जी चार गन्ने लेकर चूसने लगीं.

इस पल विष्णु जी आए और लक्ष्मी जी को देखकर नाराज हो गए व श्राप देते हुए कहा कि मैंने तुम्हें इधर आने के लिए मना किया था लेकिन तुम नहीं मानीं और किसान की चोरी का अपराध कर बैठीं. अब तुम उस किसान की 12 साल तक इस अपराध के रूप में सेवा करो. ये कहकर भगवान माता लक्ष्मी जी को छोड़कर क्षीरसागर चले गए. तो वहीं लक्ष्मी जी किसान के घर पर रहने लगीं.

वह किसान काफी गरीब व दरिद्र था. इस पर लक्ष्मी जी ने किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले इस मेरी बनाई देवी लक्ष्मी की पूजा करो और फिर रसोई बनाना. तुम जो मांगोगी वो मिलेगा. इस पर किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया. इस पूजा के प्रभाव से किसान का घर दूसरे ही दिन अन्न और धन-धान्य से भर गया. इस तरह से किसान से दिन 12 साल तक तो बहुत अच्छे तरीके से बीते.

जब 12 साल बाद लक्ष्मी जी जाने लगीं और विष्णु जी लेने आए तो किसान ने उनको भेजने से इंकार कर दिया. तो वहीं लक्ष्मी जी भी बिना किसान की मर्जी के जाने के लिए तैयार नहीं थीं. तब विष्णु जी ने एक चतुराई की. दरअसल जिस दिन विष्णु जी लक्ष्मी जी को लेने आए थे उस दिन वारुणी पर्व था. इसलिए किसान को इस पर्व का महत्व बताते हुए भगवान ने कहा कि तुम परिवार सहित गंगा में जाकर स्नान करो और इन कौड़ियों को भी जल में छोड़ देना. जब तक तुम नहीं लौटोगे तब तक मैं लक्ष्मी को नहीं ले जाऊंगा.

इस पर लक्ष्मी जी ने चार कौड़ियां किसान को गंगा में देने के लिए दी. किसान ने भी वैसा ही किया. वह पूरे परिवार के साथ गंगा स्नान करने के लिए चला गया और जैसे ही उसने गंगा जी में कौड़ियां डाली वैसे ही चार हाथ गंगा में से निकले औऱ कौड़ियां ले ली. इस पर किसान को आश्चर्य हुआ और उसने कहा कि वह तो कोई देवी है. तब किसान ने गंगा जी से पूछा- माता ये चार भुजाएं किसकी हैं?

तब गंगा जी ने कहा कि हे किसान! वे चारों हाथ मेरे ही थे और तुने जो कौड़ियां भेंट की है वह तुझे किसने दी है? इस पर किसान ने कहा कि जो स्त्री मेरे घर पर आई हैं उन्होंने दी है. इस पर गंगा जी ने कहा कि तुम्हारे घर पर जो स्त्री आई हैं वह साक्षात लक्ष्मी जी हैं और पुरुष रूप में भगवान विष्णु हैं. जैसे ही किसान ने ये सुना वह तुरंत घर लौट आया तो देखा कि भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी जाने के लिए तैयार बैठे हुए हैं. किसान ने तुरंत लक्ष्मी माता का आंचल पकड़ लिया और बोला मैं तुम्हें नहीं जाने दूंगा.

इस पर भगवान ने किसान से कहाकि इन्हें कौन जाने देता है. लेकिन ये तो चंचला हैं, कहीं ठहरती ही नहीं है. इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके. इनको मेरा श्राप था जो कि तुम्हारे पास 12 साल तक ठहरी रहीं लेकिन अब समय पूरा हो गया है और अब इनको जाना होगा. इस पर किसान ने जिद् पकड़ ली और बोला मैं भगवान से बोला कि तुम कोई और स्त्री ले जाओ लेकिन मैं लक्ष्मी जी को नहीं जाने दूंगा.

इस पर लक्ष्मी जी ने कहा-हे किसान! तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं सो करोगे. इस पर किसान ने हामी भर दी. तो लक्ष्मी जी ने बताया कि कल तेरस है, मैं तुम्हारे लिए धनतेरस मनाऊंगी. तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ रखना. रात में घी का दीपक जलाकर रखना और शाम को मेरी पूजा करना और एक तांबे के कलश में रुपया भरकर मेरे निमित्त रखना. मैं उस कलश में निवास करुंगी लेकिन पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी.

इस दिन पूजा करने से मैं पूरे साल तुम्हारे घर से नहीं जाउंगी. अगर मुझे रखना है तो इसी तरह हर साल मेरी पूजा करना. यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश से साथ ही दसो दिशाओं में फैल गईं और भगवान देखते ही रह गए. दूसरे दिन किसान ने पूरे घर को साफ करने के बाद लक्ष्मी जी की कथा के मुताबिक पूजन किया और उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया. इसी तरह किसान हर साल इसी तरह से धनतेरस पर माता लक्ष्मी की पूजा करने लगा और इसके घर में सदा के लिए लक्ष्मी जी का वास हो गया.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

ये भी पढ़ें- Dhanteras Special: धनतेरस पर इस विधि से करें स्नान…यमराज विधि से करें दीपदान; खत्म होगा अकाल मृत्यु का भय