शायद इसीलिए राघव चड्ढा ने बड़ी संख्या में सांसदों के साथ मिलकर भाजपा में विलय किया है.
राघव भाजपा में जा सकते हैं लेकिन पार्टी से इतनी बड़ी संख्या में एक साथ सांसद बगावत करेंगे, ये उम्मीद किसी को नहीं थी.
जिन्हें लेने से दूसरी पार्टियां डरती थीं. इस नेतृत्व पर देश की जनता ने एक बार नहीं, बल्कि तीन-तीन बार अपना अटूट भरोसा जताया है.
एक छोटा घर या कॉलोनी में रहने वाला परिवार अपने बच्चों के लिए खाना बनाने में तमाम दिक्कतों का सामना कर रहा है.